वायुमंडल किसे कहते हैं | वायुमंडल की सरंचना- Best Guide 2021

वायुमंडल किसे कहते हैं | वायुमंडल की सरंचना- Best Guide 2021

वायुमंडल किसे कहते हैं, वायुमंडल की सरंचना कैसी हैं या वायुमंडल की परतें कौन कौनसी हैं और वायुमंडल का महत्व क्या हैं? इन्हीं सवालों के जवाब आपको आसान भाषा में इस आर्टिकल मिलने वाले हैं। अतः आप ये लेख पूरा जरूर पढ़े:

आईये पृथ्वी के वायुमंडल को बेहतर तरीके से समझते हैं।

वायुमंडल किसे कहते हैं?

पृथ्वी के चारों ओर हजारों किलोमीटर की ऊंचाई तक फैले हुए गैसीय आवरण को वायुमंडल कहा जाता हैं। ये आवरण कई प्रकार की गैसों का मिश्रण हैं जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण पृथ्वी के आसपास मौजूद रहता हैं।

वायुमंडल की अधिकतम ऊंचाई 32000 किलोमीटर आंकी गयी हैं लेकिन इसकी निचली परत भारी गैसों एवं ऊपरी परतें हल्की गैसों की बनी हुई हैं। वायुमंडल में सबसे ज्यादा नाइट्रोजन 78% एवं ऑक्सीजन 21% गैस पायी जाती हैं। इसके अलावा जलवाष्प, एवं धूलकण की भी पाए जाते हैं। इसी वायुमंडल में जलवायु के मूल तत्व जैसे तापमान, वायुदाब, पवन आर्द्रता और वर्षा आदि देखने को मिलते हैं।

वायुमंडल की संरचना/ वायुमंडल की परतें:

धरातल से लेकर अपनी अधिकतम ऊंचाई तक वायुमंडल कई परतों में विभाजित हैं और ये परतें तापमान, घनत्व, संघटन आदि के कारण एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। वायुमंडल को पांच मुख्य परतों में विभक्त किया गया हैं – शोभ मंडल (Troposphere), समताप मंडल (Stratosphere), मध्य मंडल (Mesosphere), आयन मंडल (Ionosphere), बाह्यमंडल (Exosphere)

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शोभ मंडल (Troposphere) किसे कहते हैं?

यह वायुमंडल की सबसे निचली एवं सघन परत हैं, जिसमें वायु के सम्पूर्ण भार का 75% भाग पाया जाता हैं। धरातल से इस परत की औसत उंचाई लगभग 14 किमी मानी जाती हैं।

जलवाष्प एवं धुल- कणों के शोभ मंडल में ही संकेंद्रित होने के कारण बादलों का निर्माण, तूफान, चक्रवात आदि की उत्पत्ति जैसी मौसम सम्बन्धी घटनाएं इसी मंडल में होती हैं।

शोभ मंडल को संवहन मंडल भी कहा जाता हैं, क्यूंकि संवहन धाराएं इस मंडल के बाह्य सीमा तक ही सिमित होती हैं। इस स्तर में ऊंचाई के साथ तापमान में कमी आती हैं। तापमान में यह गिरावट की दर 1 डिग्री सेल्सियस प्रति 165 मीटर मानी जाती हैं। इसे सामान्य ह्रास दर (Normal Lapse Rate) कहा जाता हैं।

बादल, बिजली, गर्जन और वर्षा के कारण इस मंडल में वायुयान नहीं उड़ते हैं। उन्हें इससे ऊपर या अधिक ऊंचाई पर उड़ना पड़ता हैं। शोभ मंडल की ऊपरी सीमा पर विषुवत रेखा पर तापमान – 80 डिग्री C तक हो जाता हैं, जबकि ध्रुवों के ऊपर यह तापमान – 45 डिग्री C ही रहता हैं।

शोभ मण्डल तथा समताप मंडल के बीच स्थित संक्रमण स्तर को शोभ सीमा (Tropopause) कहा जाता हैं।

समताप मंडल (Stratosphere) किसे कहते हैं?

शोभ सीमा के ऊपर समताप मंडल स्थित हैं। इसकी ऊंचाई धरातल से 50 कलोमीटर तक मानी जाती हैं। इसके निचले स्तर में अर्थात 20 किमी की ऊंचाई तक तापमान लगभग स्थिर रहता हैं, परन्तु ऊपरी भाग में 50 किमी की ऊंचाई तक तापमान क्रमशः बढ़ता रहता हैं। इसका कारण यह हैं कि यहाँ सूर्य की पराबैंगनी किरणों का अवशोषण का करने वाली ओज़ोन गैस मौजूद होती हैं।

20 किलोमीटर से 35 किलोमीटर की ऊंचाई तक ओजोन परत की सघनता अधिक हैं। अतः इसे ओजोन मंडल भी कहा जाता हैं। क्लोरो फ्लोरो कार्बन (CFC), हैलोन जैसी हैलोजनेटेड गैसों के कारण मंडल को काफी नुकसान हुआ हैं।

ओजोन परत के नुक्सान के फलस्वरूप पराबैंगनी किरणों के पृथ्वी धरातल पर आने से पृथ्वी के तापमान में वृद्धि एवं कैंसर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

समताप मंडल की ऊपरी सीमा पर समताप मंडल सीमा (Stratopause) की संक्रमण पेटी स्थित हैं।

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मध्य मंडल (Mesosphere) किसे कहते हैं?

यह समताप मंडल के ऊपर स्थित हैं एवं 50 किलोमीटर से 80 किलोमीटर तक की ऊंचाई के बीच फैला हुआ हैं। इस मंडल में ऊंचाई के साथ तापमान में ह्रास होता हैं एवं 80 कि.मी. की ऊंचाई पर तापमान 100 डिग्री C हो जाता है। इसकी ऊपरी सीमा को मध्य सीमा Mesospause कहा जाता हैं।

आयन मंडल (Ionosphere) किसे कहते हैं?

इसे तापमंडल (Thermosphere) भी कहा जाता हैं क्यूंकि इस मंडल में तापमान तेजी से बढ़ता हैं इसकी ऊपरी सीमा पर यह बढ़कर 1000 डिग्री C हो जाता हैं। इसका फैलाव 80 किलोमीटर से लेकर 400 किलोमीटर की ऊंचाई तक हैं। पृथ्वी से प्रेषित रेडियो तरंगे इसी मण्डल से परावर्तित होकर पुनः पृथ्वी पर वापस लौट आती हैं।

इस मंडल की हवा विद्युत आवेशित होती हैं अतः इस मंडल में वायु के कण विद्युत विसर्जन के कारण चमकने लगते हैं। यह प्रकाश मुख्य रूप से पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों पर ही पाया जाता हैं तथा पृथ्वी के चुंबकीय उपद्रवों से इसका घनिष्ठ संबंध हैं।

जब भी कोई उल्का वायुमंडल में प्रवेश करती हैं तो इसी में आकर जलने लगती हैं।

ध्रुवीय प्रकाश पर सूर्य के धब्बों के परिवर्तन का भी काफी प्रभाव पड़ता हैं। अतः सूर्य के विद्युत विसर्जन से भी यह प्रकाश सम्बंधित हैं। उत्तरी गोलार्ध में इस प्रकाश को उत्तर ध्रुवीय प्रकाश (Aurora Borealis) एवं दक्षिणी गोलार्ध में इसे दक्षिण ध्रुवीय प्रकाश (Aurora Australis) कहा जाता हैं।

इस परत को अन्य D, E, F, G नाम की परतों में बांटा गया हैं।

बाह्यमंडल (Exosphere) किसे कहते हैं?

यह वायुमंडल की सबसे ऊपरी परत हैं। इस परत की वायु काफी विरल होती हैं एवं धीरे धीरे बाह्य अंतरिक्ष में विलीन हैं। इसकी बाह्य सीमा पर तापमान लगभग 5568 डिग्री C तक हो जाता हैं परन्तु इस गर्मी को महसूस नहीं किया जा सकता। यह हीलियम और हाइड्रोजन के अणुओं से बना हैं।

वायुमंडल का महत्व:

  • वायुमंडल के कारण ही इस पृथ्वी पर जीवन संभव हो पाया हैं क्यूंकि इससे जीव जंतुओं के लिए ऑक्सीजन तथा पेड़ पौधों के लिए कार्बन डाई ऑक्साइड मिलती है।
  • वायुमंडल ही हैं जो सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोके रखता हैं।
  • वायुमंडल की उपस्थिति से ही पृथ्वी पर जीवन के लिए उचित तापमान (लगभग 16 डिग्री C) बना रहता हैं क्यूंकि ये सूर्य की किरणों को 100% वापस अंतरिक्ष में परावर्तित नहीं होने देता हैं।
  • वायुमंडल के कारण ही पृथ्वी पर मौसम एवं जलवायु में भिन्नता पायी जाती हैं।
  • इसके कारण ही बारिश होती हैं तथा तूफान, अँधिया चलती हैं।
  • वायुमंडल की वजह से ही हमें आकाश नीला दिखाई देता हैं।
  • वायुमंडल के कारण ही हमें हर दिन सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आसमान लालिमा लिए नजर आता हैं।

और आखिर में,

इस लेख आपने जाना कि वायुमंडल किसे कहते हैं, वायुमंडल की सरंचना कैसी हैं या वायुमंडल की परतें कौन कौनसी हैं और वायुमंडल का महत्व क्या हैं?

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Rakesh Verma

Rakesh Verma is a Blogger, Affiliate Marketer and passionate about Stock Photography.

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