ऑपरेटिंग सिस्टम कैसे काम करता है? (Operating System Working in Hindi)
आज ज़रा अपने आसपास नज़र डालिए। सुबह अलार्म मोबाइल में बजता है, फिर WhatsApp चेक करते हैं, YouTube खोलते हैं, ऑनलाइन क्लास या ऑफिस का काम करते हैं।
आपने कभी सोचा है कि ये सब इतना आसानी से कैसे हो जाता है? हम सिर्फ स्क्रीन पर टच या क्लिक करते हैं और काम तुरंत हो जाता है। असल में इस पूरे सिस्टम को पर्दे के पीछे जो संभाल रहा होता है, वही ऑपरेटिंग सिस्टम होता है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है, यह कैसे काम करता है, इसके कार्य, घटक, प्रकार, Kernel की भूमिका और आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम की विशेषताएँ क्या हैं।
इस लेख में हम ऑपरेटिंग सिस्टम को सिर्फ किताबों की भाषा में नहीं, बल्कि real-life examples, आसान भाषा और NCERT / competitive exam के अनुसार समझेंगे, ताकि यह टॉपिक हमेशा के लिए आपके दिमाग में बैठ जाए।
ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है?
ऑपरेटिंग सिस्टम एक सिस्टम सॉफ्टवेयर है जो यूज़र और कंप्यूटर हार्डवेयर के बीच इंटरफेस का कार्य करता है।
ऑपरेटिंग सिस्टम एक System Software होता है जो यूज़र और कंप्यूटर हार्डवेयर के बीच एक सेतु (Interface) का काम करता है। बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के न तो कंप्यूटर को चलाया जा सकता है और न ही कोई एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर उपयोग में लाया जा सकता है।
सरल शब्दों में समझें तो ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर का मैनेजर होता है। जैसे किसी ऑफिस में मैनेजर सभी कर्मचारियों का काम बाँटता है, वैसे ही OS CPU, RAM, हार्ड डिस्क और डिवाइसों का सही उपयोग करवाता है।
जब यूज़र कोई कमांड देता है, जैसे माउस से क्लिक करना, कीबोर्ड से टाइप करना या मोबाइल स्क्रीन पर टच करना, तो यह आदेश सबसे पहले ऑपरेटिंग सिस्टम तक पहुँचता है। OS उस कमांड को समझकर हार्डवेयर को निर्देश देता है।
ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर को यह बताता है कि उसे क्या करना है, कैसे करना है और कब करना है। अगर ऑपरेटिंग सिस्टम न हो, तो कंप्यूटर ऐसा हो जाएगा जैसे बिना ड्राइवर की गाड़ी — इंजन है, पहिए हैं, लेकिन चलाने वाला कोई नहीं।
ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता क्यों होती है? (Why OS is Needed)
मान लीजिए आप किसी होटल में गए हैं। वहाँ शेफ खाना बनाता है, वेटर खाना लाता है और मैनेजर सबको निर्देश देता है। अगर मैनेजर न हो, तो सब गड़बड़ हो जाएगी।
ठीक यही काम ऑपरेटिंग सिस्टम करता है। इसकी आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि:
- यह यूज़र और मशीन के बीच संवाद कराता है
- CPU, Memory और Storage का सही उपयोग करता है
- एक साथ कई काम करने की सुविधा देता है (Multitasking)
- डेटा को सुरक्षित रखता है
- कंप्यूटर को यूज़र-फ्रेंडली बनाता है
अगर कंप्यूटर में ऑपरेटिंग सिस्टम न हो, तो कंप्यूटर सिर्फ एक हार्डवेयर मशीन बनकर रह जाएगा। यूज़र न तो उससे संवाद कर पाएगा और न ही किसी प्रकार का काम कर पाएगा।
ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच तालमेल बनाने के लिए
- CPU, RAM, Storage जैसे संसाधनों का सही उपयोग करने के लिए
- यूज़र को आसान और ग्राफिकल इंटरफेस देने के लिए
- डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के लिए
- एक साथ कई प्रोग्राम चलाने (Multitasking) के लिए
ऑपरेटिंग सिस्टम कैसे काम करता है?
ऑपरेटिंग सिस्टम का कार्य एक सतत (Continuous) प्रक्रिया होती है। कंप्यूटर के चालू होने से लेकर बंद होने तक OS लगातार काम करता रहता है।
अब हम OS के काम करने की प्रक्रिया को बिल्कुल कहानी और उदाहरण की तरह समझते हैं।
1. Booting Process (कंप्यूटर की नींद से जागना)
जब आप कंप्यूटर का पावर बटन दबाते हैं, तो कंप्यूटर ऐसे ही नहीं चल पड़ता। पहले BIOS/UEFI उठकर देखता है कि RAM, Keyboard, Hard Disk ठीक हैं या नहीं। इसे POST (Power On Self Test) कहते हैं।
इसके बाद ऑपरेटिंग सिस्टम को Hard Disk से उठाकर RAM में लाया जाता है। इसे ऐसे समझिए जैसे सुबह ऑफिस जाने से पहले इंसान तैयार होता है। OS के लोड होते ही कंप्यूटर काम के लिए तैयार हो जाता है।
2. User Interface प्रदान करना
ऑपरेटिंग सिस्टम यूज़र को कंप्यूटर से बातचीत करने के लिए इंटरफेस देता है। यह दो प्रकार का हो सकता है:
- पहले जमाने में CLI (Command Line Interface) – जैसे MS-DOS, Linux Terminal
- आज के समय में GUI (Graphical User Interface) – जैसे Windows, macOS, Android
GUI की मदद से यूज़र माउस, आइकन और मेन्यू का उपयोग करके आसानी से काम कर सकता है। GUI ऐसा है जैसे रिमोट कंट्रोल — बटन दबाओ और काम हो जाए।
3. User Input को Process करना
जब यूज़र कोई कार्य करता है, जैसे किसी फाइल को ओपन करना या ऐप लॉन्च करना, तो यह इनपुट OS के पास जाता है। OS यह तय करता है कि इस कार्य के लिए कौन सा प्रोग्राम और कौन सा हार्डवेयर संसाधन उपयोग होगा।
मान लीजिए आपने माउस से Chrome पर क्लिक किया। यह क्लिक सीधे Chrome तक नहीं जाता, बल्कि पहले OS के पास जाता है। OS तय करता है:
- RAM कितनी देनी है
- CPU कब देगा
- कौन सा फाइल सिस्टम इस्तेमाल होगा
यानी OS एक ट्रैफिक पुलिस की तरह सब कुछ कंट्रोल करता है।
4. Resource Management
ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर के सभी संसाधनों का प्रबंधन करता है। यह तय करता है कि CPU किस प्रोसेस को कितनी देर देगा, RAM किस प्रोग्राम को मिलेगी और स्टोरेज का उपयोग कैसे होगा।
अगर एक ही समय में YouTube, WhatsApp और Browser खुले हों, तो OS तय करता है कि किसे पहले CPU मिलेगा। बिल्कुल वैसा ही जैसे माँ रसोई में तय करती है कि पहले गैस पर दाल चढ़ेगी या सब्ज़ी।
5. Output प्रदान करना
कार्य पूरा होने के बाद OS रिज़ल्ट को मॉनिटर, प्रिंटर, स्पीकर या अन्य आउटपुट डिवाइस तक पहुँचाता है।
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ऑपरेटिंग सिस्टम के मुख्य कार्य (Functions of Operating System)

1. Process Management
जब कोई प्रोग्राम चल रहा होता है, तो उसे Process कहते हैं। OS यह तय करता है कि कौन सा Process कब CPU लेगा। Exam Tip: Multitasking OS में CPU समय को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटा जाता है।
2. Memory Management
RAM सीमित होती है, इसलिए OS यह तय करता है कि किस प्रोग्राम को कितनी मेमोरी मिलेगी। जब कोई प्रोग्राम बंद हो जाता है, तो उसकी मेमोरी को खाली कर दिया जाता है ताकि अन्य प्रोग्राम उसका उपयोग कर सकें।
Real Life Example: जैसे परीक्षा के बाद कॉपी जमा हो जाती है, वैसे ही कंप्यूटर बंद होने पर OS मेमोरी वापस ले लेता है।
3. File Management
ऑपरेटिंग सिस्टम फाइलों और फोल्डरों को व्यवस्थित करता है। फाइल को सेव करना, डिलीट करना, नाम बदलना, कॉपी करना और सुरक्षा देना OS का काम होता है।
4. Device Management
कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर, स्कैनर, कैमरा आदि डिवाइसेज़ को OS डिवाइस ड्राइवर की मदद से नियंत्रित करता है।
5. Security Management
आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम यूज़र डेटा की सुरक्षा के लिए पासवर्ड, फिंगरप्रिंट, फेस लॉक, एन्क्रिप्शन और परमिशन सिस्टम प्रदान करते हैं।
Kernel क्या है?
Kernel ऑपरेटिंग सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यह हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच सीधा संपर्क बनाता है। Kernel के बिना ऑपरेटिंग सिस्टम कार्य नहीं कर सकता।
Kernel ऑपरेटिंग सिस्टम का दिल होता है। यूज़र सीधे Kernel से बात नहीं करता। Kernel ही हार्डवेयर से बात करता है। अगर OS शरीर है, तो Kernel उसका दिमाग है।
Kernel के मुख्य कार्य:
- CPU शेड्यूलिंग
- मेमोरी प्रबंधन
- डिवाइस कंट्रोल
- सिस्टम कॉल्स को संभालना
Kernel के प्रकार:
- Monolithic Kernel
- Micro Kernel
- Hybrid Kernel
ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार (Types of Operating System)
1. Batch Operating System
इस OS में जॉब्स को समूह (Batch) में प्रोसेस किया जाता है। यूज़र का सीधा हस्तक्षेप नहीं होता।
2. Time Sharing Operating System
इसमें CPU समय को कई यूज़र और प्रोसेस में बाँटा जाता है।
3. Distributed Operating System
यह कई कंप्यूटरों को जोड़कर एक सिस्टम की तरह काम करता है।
4. Real Time Operating System (RTOS)
यह OS समय-संवेदनशील कार्यों के लिए उपयोग होता है, जैसे मेडिकल और एयरोस्पेस सिस्टम।
5. Mobile Operating System
मोबाइल डिवाइस के लिए बनाया गया OS जैसे Android और iOS।
लोकप्रिय ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण
- Microsoft Windows
- Linux
- macOS
- Android
- iOS
आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम की विशेषताएँ
आज के ऑपरेटिंग सिस्टम पहले से अधिक तेज़, सुरक्षित और स्मार्ट हो चुके हैं। इनमें क्लाउड इंटीग्रेशन, AI सपोर्ट, ऑटोमैटिक अपडेट और बेहतर यूज़र एक्सपीरियंस शामिल है।
निष्कर्ष (Conclusion)
ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर का आधार होता है। बिना OS के कंप्यूटर केवल एक बेकार मशीन है। OS कंप्यूटर को समझदार बनाता है और यूज़र के काम को आसान करता है।
ऑपरेटिंग सिस्टम न केवल कंप्यूटर को चलाने में मदद करता है, बल्कि यूज़र और मशीन के बीच संवाद को आसान बनाता है। बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के कंप्यूटर का कोई अस्तित्व नहीं है।
यदि आप कंप्यूटर साइंस के छात्र हैं या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो ऑपरेटिंग सिस्टम की यह जानकारी आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
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