विश्व में कृषि के प्रकार क्या हैं? | Krishi Ke Prakar in Hindi

भूगोल और सामाजिक अध्ययन की प्रतियोगी परीक्षाओं में विश्व में कृषि के प्रकार (Krishi Ke Prakar) का ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है। कृषि केवल भोजन का स्रोत नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता, आर्थिक विकास और पर्यावरण के साथ गहरे संबंध में है।

विश्व भर में विभिन्न प्रकार की कृषि की जाती है, जो जलवायु, भूमि की उर्वरता, जनसंख्या घनत्व और आर्थिक आवश्यकताओं पर निर्भर करती है। इस लेख में हम स्थानांतरणशील कृषि, जीविका कृषि, वाणिज्यिक कृषि, बागानी/रोपण कृषि और गहन कृषि को विस्तार से जानेंगे।

विश्व में कृषि के प्रकार (Krishi Ke Prakar):

Shifting Cultivation- स्थांनांतरणशील कृषि क्या है?

यह कृषि का सर्वाधिक प्राचीन रूप है, जो मुख्यतः उष्ण कटिबंधीय वनों में रहने वाली जनजातियों द्वारा की जाती है। इस प्रकार की कृषि में वन के छोटे भू-भाग में वृक्षों एवं झाड़ियों को काटकर जला दिया जाता है एवं इस भूमि पर कुछ वर्षों तक कृषि की जाती है।

भूमि की उर्वरता समाप्त हो जाने पर किसी दूसरी जगह पर यही क्रिया दुहराई जाती है। अतः इसे काटना (Slash) एवं जलाना (Burn Farming) कृषि भी कहा जाता है। इसे बुश फेलो कृषि भी कहा जाता है।

इस कृषि को विश्व के विभिन्न भागों में विभिन्न नामों से जाना जाता हैं

नामक्षेत्र
लदांग (Ladang)इंडोनेशिया एवं मलेशिया
मिल्पा (Milpa)मध्य अमेरिका एवं मैक्सिको
रोका (Roca)ब्राजील
कोनुको (Conuco)वेनेजुएला
झूम (Jhum)उत्तर-पूर्वी भारत
टावी (Tavy)मेडागास्कर
केंगिन (Kengin)फिलीपींस
मसोल (Masol)जायरे एवं मध्य अफ्रीका
हुमा (Huma)जावा एवं इंडोनेशिया
तुंग्या (Tungya)म्यांमार (बर्मा)
चेन्ना (Chena)श्रीलंका
लोगन (Logan)पश्चिमी अफ्रीका

विश्व में स्थानांतरणशील कृषि के क्षेत्र

नामक्षेत्र
लदांग (Ladang)इंडोनेशिया, मलेशिया
मिल्पा (Milpa)मध्य अमेरिका, मैक्सिको
रोका (Roca)ब्राजील
कोनुको (Conuco)वेनेजुएला
झूम (Jhum)उत्तर-पूर्व भारत
टावी (Tavy)मेडागास्कर
केंगिन (Kengin)फिलीपींस
मसोल (Masol)जायरे और मध्य अफ्रीका
हुमा (Huma)जावा, इंडोनेशिया
तुंग्या (Tungya)म्यांमार
चेन्ना (Chena)श्रीलंका
लोगन (Logan)पश्चिमी अफ्रीका

विशेषताएँ

  • भूमि की उर्वरता कम होने पर नई भूमि का चयन किया जाता है।
  • छोटी-छोटी खेती, ज्यादातर परिवारिक स्तर पर।
  • फसलों का मिश्रण (Millet, Maize, Tapioca) आम।
  • कृषि अवधि सामान्यतः 2–3 साल।

लाभ और हानि

लाभ:

  • वन्य जीवन और जैव विविधता के संरक्षण में मदद।
  • प्राकृतिक उर्वरक और मिट्टी की जाँच बनी रहती है।

हानि:

  • जंगल की कटाई और भूमि क्षरण।
  • लंबे समय तक सतत उत्पादन संभव नहीं।

2. Subsistence Agriculture- जीविका कृषि क्या हैं?

कृषि करने वाले परिवार की मात्र आजीविका भर फसल उगाने वाली कृषि को जीविका कृषि कहा जाता है। इस प्रकार की कृषि में अधिक जनसंख्या के भोजन की आपूर्ति हेतु भूमि का अधिकतम उपयोग किया जाता है।

भारत, बांग्लादेश, इंडोनेशिया आदि देशों में इस प्रकार की कृषि होती है।

जीविका कृषि के क्षेत्र

  • भारत के ग्रामीण क्षेत्र
  • बांग्लादेश
  • इंडोनेशिया
  • अफ्रीका के कुछ क्षेत्र

जीविका कृषि की विशेषताएँ

  • सीमित भूमि पर उगाई जाती है।
  • उन्नत तकनीक और मशीनरी का प्रयोग कम।
  • मुख्य फसलें: चावल, गेहूं, बाजरा, ज्वार।
  • उत्पादन लगभग केवल परिवार की आवश्यकताओं तक सीमित।

जीविका कृषि के लाभ और हानि

जीविका कृषि के लाभ:

  • परिवार की भोजन सुरक्षा सुनिश्चित।
  • कम निवेश की आवश्यकता।

जीविका कृषि से हानि:

  • अतिरिक्त उत्पादन कम, व्यापारिक लाभ नहीं।
  • आधुनिक तकनीक का अभाव।

3. Commercial Agriculture- वाणिज्यिक कृषि क्या हैं?

इस प्रकार की कृषि मुख्यतः विकसित देशों द्वारा की जाती हैं। विश्व में खाद्य फसलों की व्यापारिक कृषि कुछ सिमित क्षेत्रों में ही की जाती है।

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विश्व में कृषि के प्रकार | Krishi Ke Prakar in Hindi

इस प्रकार की कृषि की सर्वाधिक महत्वपूर्ण फसल गेहूं है। गेहूं की वाणिज्यिक कृषि विश्व के शीतोष्ण कटिबंधीय घास में मैदानों (स्टेपी, प्रेयरी, वेल्ड, पम्पास) में बड़े पैमाने पर की जाती हैं।

वाणिज्यिक कृषि क्षेत्र

  • उत्तर अमेरिका: स्टेपी, प्रेयरी, पम्पास
  • यूरोप: फ्रांस, जर्मनी, यूके
  • ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड

वाणिज्यिक कृषि की विशेषताएँ

  • बड़े खेत और उच्च उत्पादन।
  • मशीनरी और उन्नत तकनीक का प्रयोग।
  • प्रमुख फसलें: गेहूं, जौ, मकई, सोयाबीन।

वाणिज्यिक कृषि के लाभ और हानि

वाणिज्यिक कृषि से लाभ:

  • निर्यात और आर्थिक लाभ।
  • खाद्य सुरक्षा।

वाणिज्यिक कृषि से हानि:

  • पर्यावरणीय दबाव (मिट्टी की उर्वरता कम होती है)।
  • बायोडायवर्सिटी पर प्रभाव।

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4. Plantation Agriculture- रोपण कृषि या बागानी कृषि क्या हैं?

यह इस कृषि का विशिष्ट रूप है, जिसमें पूर्णतः व्यापारीक उद्देश्य के लिए नगदी फसलों की कृषि की जाती है। इस प्रकार की कृषि का विस्तार मुख्यतः एशिया, अफ्रीका एवं अमेरिका के उष्ण एवं उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है। इन क्षेत्रों में कहवा, चाय, मसाले, रबड़ आदि की बागानी कृषि की जाती है।

विश्व में रोपण कृषि क्षेत्र

  • भारत: असम, कर्नाटक, केरल
  • श्रीलंका: चाय और गन्ना
  • अफ्रीका: कोफी और चाय
  • अमेरिका: रबर और कैफी

रोपण कृषि या बागानी की विशेषताएँ

  • बड़े बाग और लगातार फसल उत्पादन।
  • विशेष कृषि तकनीक और सिंचाई।
  • प्रमुख फसलें: चाय, कॉफी, रबर, केसर, मसाले।

रोपण कृषि या बागानी के लाभ और हानि

रोपण कृषि के लाभ:

  • निर्यात और रोजगार।
  • आर्थिक समृद्धि।

रोपण कृषि से हानि:

  • भूमि का अत्यधिक दोहन।
  • स्थानीय खाद्य फसलों पर असर।

5. Intensive farming- गहन कृषि क्या हैं?

इस प्रकार की कृषि मुख्य रूप से अधिक जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों में की जाती है। इस प्रकार की कृषि में फसलों का अधिक उत्पादन प्राप्त करने हेतु कृषि भूमि की प्रत्येक इकाई पर अधिक मात्रा में पूंजी एवं श्रम का उपयोग किया जाता है।

कम क्षेत्र से अधिकतम उत्पादन प्राप्त करना इस कृषि का उद्देश्य है। इस प्रकार की कृषि में छोटे-छोटे खेतों में रासायनिक उर्वरक, उन्नत बीज, सिंचाई, फसल चक्र के माध्यम से अधिकतम उत्पादन प्राप्त किया जाता है।

इस प्रकार गहन कृषि में फसलों का प्रति हेक्टेयर उत्पादन काफी अधिक होता है। जापान, चीन, भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया, बांग्लादेश आदि में इस प्रकार की कृषि की जाती हैं।

विश्व में गहन कृषि क्षेत्र

  • जापान
  • चीन
  • भारत (हिमाचल, पंजाब, उत्तर प्रदेश)
  • इंडोनेशिया, बांग्लादेश, मलेशिया

गहन कृषि की विशेषताएँ

  • उच्च उत्पादन प्रति हेक्टेयर।
  • उन्नत बीज, सिंचाई और रासायनिक उर्वरक का उपयोग।
  • छोटे खेतों में कई फसल चक्र।

गहन कृषि से लाभ और हानि

गहन कृषि से लाभ:

  • अधिक उत्पादन, अधिक लाभ।
  • खाद्य सुरक्षा।

गहन कृषि से हानि:

  • मिट्टी की उर्वरता घटती है।
  • पर्यावरणीय दबाव और रासायनिक प्रदूषण।

निष्कर्ष:

विश्व में कृषि के प्रकार अलग-अलग जलवायु, भूमि और जनसंख्या घनत्व पर आधारित हैं।

कृषि प्रकारउद्देश्यक्षेत्रप्रमुख फसलें
स्थानांतरणशील कृषिजीविका, पारंपरिकउष्णकटिबंधीय वनमक्का, बाजरा, ज्वार
जीविका कृषिपरिवार की आजीविकाग्रामीण क्षेत्रचावल, गेहूं, बाजरा
वाणिज्यिक कृषिआर्थिक लाभविकसित देशगेहूं, जौ, मकई
बागानी/रोपण कृषिव्यापारिकउष्ण/उपोष्ण क्षेत्रचाय, कॉफी, रबर
गहन कृषिउच्च उत्पादनअधिक जनसंख्या क्षेत्रसब्जी, चावल, गेहूं

इस लेख में हमने विश्व में कृषि के प्रकार (Krishi Ke Prakar), उनकी विशेषताएँ, क्षेत्र और प्रमुख फसलें विस्तार से देखीं।

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