Jet Stream Notes in Hindi | जेट स्ट्रीम क्या है और भारत पर इसका प्रभाव
इस लेख में आज आप जेट स्ट्रीम क्या है, यह कैसे बनती है, कितनी ऊंचाई पर चलती है, इसके प्रकार कौन‑कौन से हैं और भारत की जलवायु व मानसून पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है – इन सभी बिंदुओं को विस्तार से जानेंगे।
यह लेख विशेष रूप से UPSC, SSC, State PCS और Geography की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए उपयोगी है।
यह अध्ययन सामग्री NCERT Geography (कक्षा 11) एवं UPSC/State PCS सिलेबस के अनुरूप तैयार की गई है।
जेट स्ट्रीम क्या है (jet stream की परिभाषा)
जेट स्ट्रीम उच्च स्तरीय पवन संचार व्यवस्था का अंग हैं जिसमें शोभमंडल (Troposphere) की ऊपरी परतों में (शोभसीमा के समीप) पश्चिम से पूर्व की ओर अत्यंत तीव्र गति से चलने वाली पवन धाराएं मौजूद होती हैं।
इनकी तीव्रता एवं तेज शोर के कारण ही इन वायु धाराओं को जेट स्ट्रीम कहा जाता हैं।
जेट स्ट्रीम कहां चलती है?

जेट स्ट्रीम दोनों ही गोलार्धों में पृथ्वी के चारों ओर निरंतर प्रवाहित होती रहती हैं। ये पवन धाराएँ सामान्यतः समुद्र तल से 6,000 मीटर से 12,000 मीटर की ऊंचाई के बीच पाई जाती हैं।
इनकी गति स्थिर नहीं होती बल्कि मौसम और अक्षांश के अनुसार बदलती रहती है।
जेट स्ट्रीम की ऊंचाई और गति

जेट स्ट्रीम प्रायः 8 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर बहती हैं। इनकी औसत गति लगभग 300 से 500 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है।
शीत ऋतु में इनकी गति ग्रीष्म ऋतु की तुलना में अधिक पाई जाती है, क्योंकि उस समय तापमान का अंतर अधिक होता है।
जेट स्ट्रीम सिद्धांत किसने दिया?
इन पवन धाराओं की खोज का श्रेय द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी बमवर्षक विमान चालकों को जाता हैं।
इन ऊपरी वायुमण्डल की हवाओं के लिए जेट स्ट्रीम शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1947 में C. G. Rossby द्वारा किया गया।
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जेट स्ट्रीम किस मंडल में पाई जाती है?
जेट स्ट्रीम ऊपरी शोभ मंडल एवं समताप मंडल के बीच में हजारों किलोमीटर लम्बी एक लहरदार पट्टी के रूप में बहती रहती हैं और इसके मध्य में हवाएं काफी तीव्रता के साथ चलती हैं। इसलिए इसे धारा कहते हैं।
ऋतु के अनुसार इनका वेग बदलता रहता हैं। ग्रीष्म ऋतु की अपेक्षा शीत ऋतु में जेट स्ट्रीम काफी तेजी से चलती हैं।
इस धारा का सर्वाधिक औसत वेग उपोष्ण कटिबंधीय उच्च भार वाले क्षेत्रों के ऊपर होता हैं।
सूर्य के दक्षिणायन और उत्तरायण होने के साथ-साथ जेट स्ट्रीम का भी स्थानांतरण होता रहता हैं।
जेट स्ट्रीम की मदद से मानसून की उत्पत्ति की क्रिया-विधि जानने में सबसे आधुनिक एवं विश्वसनीय सिद्धांत के रूप में बल मिलता हैं।
जेट स्ट्रीम के प्रकार
जेट स्ट्रीम को सामान्यतः दो प्रमुख प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
1. ध्रुवीय जेट स्ट्रीम (Polar Jet Stream)
यह जेट स्ट्रीम 45° से 65° अक्षांशों के बीच प्रवाहित होती है। इसका निर्माण ठंडी ध्रुवीय वायु और गर्म समशीतोष्ण वायु के मिलने से होता है।
यह जेट स्ट्रीम मौसम परिवर्तन और पश्चिमी विक्षोभ से गहराई से जुड़ी होती है।
2. उपोष्णकटिबंधीय जेट स्ट्रीम (Subtropical Jet Stream – STJ)
यह जेट स्ट्रीम 20° से 40° अक्षांशों के बीच बहती है। भारतीय उपमहाद्वीप की जलवायु और विशेष रूप से मानसून पर इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
जेट स्ट्रीम की उत्पत्ति कैसे होती है?
जेट स्ट्रीम की उत्पत्ति का संबंध भूमध्य रेखा और ध्रुवों के बीच तापमान अंतर, ध्रुवीय उच्च दाब तथा ऊपरी वायुमंडल में उत्पन्न परिध्रुवीय भंवर (Circumpolar Vortex) से होता है।
ताप प्रवणता के कारण हवाएँ अत्यधिक गति प्राप्त कर लेती हैं और जेट स्ट्रीम का निर्माण होता है।
जेट स्ट्रीम और ऋतु परिवर्तन का संबन्ध
ऋतु के अनुसार जेट स्ट्रीम की स्थिति और गति में परिवर्तन होता रहता है। सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन के साथ जेट स्ट्रीम भी उत्तर‑दक्षिण दिशा में स्थानांतरित होती रहती है।
शीत ऋतु में यह अधिक दक्षिण की ओर खिसक जाती है, जबकि ग्रीष्म ऋतु में उत्तर की ओर चली जाती है।
जेट स्ट्रीम का भारत की जलवायु पर प्रभाव
जेट स्ट्रीम भारत की जलवायु को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। यह:
- पश्चिमी विक्षोभ को नियंत्रित करती है
- उत्तर भारत में शीत ऋतु की वर्षा में सहायक होती है
- तापमान और वायुदाब में परिवर्तन लाती है
जेट स्ट्रीम और भारतीय मानसून
जेट स्ट्रीम मानसून को प्रभावित करती है (El Nino effect की तरह) भारतीय मानसून के लिए उपोष्णकटिबंधीय जेट स्ट्रीम (STJ) अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
ग्रीष्म ऋतु में जब STJ हिमालय के उत्तर की ओर खिसक जाती है, तब दक्षिण‑पश्चिम मानसून के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनती हैं।
इसीलिए जेट स्ट्रीम को मानसून की उत्पत्ति का एक आधुनिक और विश्वसनीय सिद्धांत माना जाता है।
FAQs (Frequently Asked Questions):
प्रश्न – जेट स्ट्रीम क्या है समझाइए?
उत्तर: जेट स्ट्रीम ऊपरी क्षोभमंडल में पश्चिम से पूर्व दिशा में बहने वाली तीव्र गति की पवन धाराएँ हैं।
प्रश्न – जेट स्ट्रीम कितने डिग्री पर चलती है?
उत्तर : ध्रुवीय जेट स्ट्रीम :- यह 45 डिग्री से 65 डिग्री अक्षांशों के बीच चलती है।
पछुआ स्ट्रीम : – यह 20 डिग्री से 40 डिग्री अक्षांशों के बीच चलती हैं।
प्रश्न – जेट स्ट्रीम कहां बनती है?
उत्तर : जेट धाराएं क्षोभमंडल और समताप मंडल के बीच के क्षेत्र में ठंडी हवा और गर्म हवा के मिलने पर बनती हैं।
प्रश्न – जेट स्ट्रीम कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर : दो ध्रुवीय जेट धाराएँ एवं उपोष्णकटिबंधीय जेट धाराएँ
प्रश्न – जेट धाराएं कैसे महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर : जेट स्ट्रीम ऊपर की ओर उच्च गति से प्रवाहित होती है और उस स्तर पर हवा और दबाव में परिवर्तन का कारण बनती है
प्रश्न – जेट स्ट्रीम का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर : जेट धाराएं
प्रश्न – जेट स्ट्रीम कहाँ चलती है?
उत्तर : जेट स्ट्रीम या जेटधाराएँ ऊपरी वायुमंडल में तेज़ गति से प्रवाहित/बहने वाली हवाएँ है।
प्रश्न – जेट स्ट्रीम की उत्पत्ति कैसे होती है?
उत्तर : इसकी उत्पत्ति का संबंध भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर उत्पन्न होने वाली ताप प्रवणता, ध्रुवों पर उत्पन्न उच्च दाब तथा इसके ऊपर उत्पन्न निम्न दाब के कारण जनित परिध्रुवीय भंवर से है।
प्रश्न – जेट धाराएं भारत की जलवायु को कैसे प्रभावित करती हैं?
उत्तर : जेटस्ट्रीम रात के तापमान के संकेतों को औसत रूप से बढ़ाकर भारतीय जलवायु को प्रभावित करता है
प्रश्न – जेट धाराएं कितनी ऊंचाई पर प्रवाहित होती है?
उत्तर ; जेट धाराएं धरातल से 8-15 किमी की ऊंचाई पर बहती है।
प्रश्न – भारतीय मानसून के लिए कौन सी जेट स्ट्रीम जिम्मेदार है?
उत्तर : उपोष्णकटिबंधीय जेट स्ट्रीम (STJ)
प्रश्न – जेट धाराएं अक्षांश के कितने डिग्री के बीच होती हैं?
उत्तर : जेट धाराएं 20 डिग्री अक्षांश से लेकर ध्रुवीय अक्षांशों के बीच चलती हैं।
आज आपने क्या सीखा?
इस लेख में आपने जाना कि Jet Stream Kya Hai, इसके प्रकार, ऊंचाई, गति, उत्पत्ति और भारतीय जलवायु व मानसून पर इसके प्रभाव क्या हैं।
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