स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय (Swami Vivekananda Biography in Hindi)

स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय भारत के एक ऐसे युग पुरुष की कहानी है, जिन्हें एक महान संन्यासी, विचारक और आध्यात्मिक गुरु के रूप में पूरे विश्व में जाना जाता है। स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों और कर्मों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और वेदांत दर्शन का विश्वभर में प्रचार किया।

इस लेख में आप स्वामी विवेकानंद का प्रारंभिक जीवन, गुरु रामकृष्ण परमहंस से संबंध, शिकागो का ऐतिहासिक भाषण, प्रमुख यात्राएँ, अनमोल विचार और महासमाधि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सरल हिंदी में पढ़ेंगे।

Swami Vivekananda Biography in Hindi

सनातन धर्म के महान प्रवक्ता और प्रचारक और वेदांत दर्शन के महान ज्ञाता, आध्यात्मिकता से परिपूर्ण स्वामी विवेकानंद भारत के एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपने महान विचारों और आध्यात्मिक ज्ञान के बल पर समस्त मानव जीवन और विशेषकर युवा जगत को एक नयी राह दिखाई है। उनके जन्मदिवस को भारत में युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

स्वामी विवेकानंद भारत के एक ऐसे पथ प्रदर्शक थे जिन्होंने सम्पूर्ण विश्व को भारत की सभ्यता और संस्कृति से रूबरू कराया। उनके महान विचार आज भी युवाओं को प्रेरित करते है, वे हमेशा पुरुषार्थ यानि कर्म करने में विश्वास करते थे।

वे स्वामी रामकृष्ण परमहंस के सबसे सुयोग्य शिष्य थे। वे हमेशा अपने गुरु की सेवा पूर्ण समर्पण भाव से करते थे। इसी की बदौलत वो बाद में अपने कर्म पथ पर आगे बढ़ते हुए काफी प्रसिद्द हुए। 

Swami Vivekananda Biography in Hindi, Swami Vivekananda Chicago Speech, स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय हिंदी में

उन्होंने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी जहाँ पर धर्म-जाति के आधार पर मनुष्यों में कोई भेदभाव न रहे। उनका एक सबसे महान उद्बोधन था कि “कर्म करते रहो और तब तक आराम मत करो जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाये।”

स्वामी विवेकानंद का प्रारंभिक जीवन (Early Life)

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 में कलकत्ता के एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था जो एक धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थी। स्वामी विवेकानंद का बचपन का नाम वीरेश्वर रखा गया परन्तु उनको लोग नरेंद्नाथ दत्त ही कहकर बुलाते थे।

उनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त था जो कलकत्ता हाईकोर्ट में एक प्रसिद्ध वकील थे और वो पाश्चात्य सभ्यता से काफी ज्यादा प्रभावित थे।

इसलिए वो बालक नरेन्द्रनाथ को अंग्रेज़ी पढ़ाई कराकर उनके जैसे ही बनाना चाहते थे और आठ साल की उम्र में ईश्वरचंद्र विद्यासागर मेट्रोपोलिटन संस्थान में उनका दाखिला कराया गया जहां से उन्होंने अपनी पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई शुरू की।

बालक नरेंद्रनाथ बचपन में काफी शरारती और जिज्ञासु प्रवृत्ति के थे। यानि अगर वो एक बार किसी बात को ठान लेते तो उसे पूरा करके ही मानते। ऐसा ही उनके बचपन का एक किस्सा है-

जब वो छोटे थे तब उनके घर के बाहर एक बड़ा से पेड़ था और एक बार किसी ने उनसे कहा कि उस पेड़ पर कभी मत चढ़ना क्यूंकि उस पेड़ पर एक भूत रहता है।

बालक नरेन्द्रनाथ को यह बात इतनी रहस्यमय लगी की उस दिन उन्होंने पूरी रात अकेले ही उस पेड़ पर बैठ कर ही निकाल दी सिर्फ ये जानने के लिए कि वास्तव में उस पेड़ पर कोई भूत रहता है या नहीं, और वो कैसा दीखता है।

स्वामी विवेकानंद का शिकागो भाषण एवं यात्राएँ:

स्वामी विवेकानन्द ने रामकृष्‍ण मठ, रामकृष्‍ण मिशन और वेदांत सोसाइटी की नींव रखी। उन्होंने 31 मई 1893 में अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्मसम्मेलन में भारत की और से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था।

कहा जाता है कि उस समय वहाँ पर कई धर्मो की धार्मिक पुस्तकें एक के ऊपर एक रखी हुई थी और उनमे सबसे नीचे भागवत गीता रखी हुई थी। ये देखकर सभा में मौजूद कुछ लोग हिन्दू धर्म का मजाक बनाने लगे और हिन्दू धर्म ग्रंथों को तुच्छ कहने लगे।

तो स्वामी विवेकानंद ने यह कहकर सबका मुँह बंद कर दिया कि “जिसे आप सब तुच्छ समझ रहे है असल में उसमें इतनी ताकत कि वो अकेला ग्रन्थ इन सभी धर्म ग्रंथो का बोझ उठाने की क्षमता रखता है।”

उस समय पश्चिमी सभ्यता के लोग भारत जैसे औपनिवेशिक (पराधीन) देशों को हेय दृष्टि से देखते थे। इसलिए ज्यादातर लोगो की कोशिश थी स्वामी विवेकानंद को उस धर्म सम्मेलन में बोलने का मौका ही न मिले।

परन्तु एक अमरीकी प्रोफेसर की मदद से उन्हें धर्मसभा में बोलने का मौका मिल गया परन्तु वहां उन्हें सिर्फ दो पहले बोलने का मौका नहीं मिल रहा था, तब उन्होंने अपने उस ऐतिहासिक भाषण की शुरुआत “मेरे अमरीकी भाइयों और बहनों“ सम्बोधन के साथ शुरू की बाद में speech लंबी चली।

उनके इस उद्बोधन ने वहा उपस्थित सभी लोगो का दिल जीत लिया था और इसके बाद अमरीका में उनका जोरदार स्वागत किया गया। उस भाषण से उन्हें पूरी दुनिया में काफी प्रसिद्धि मिली और वहाँ उनके भक्तों का एक बहुत बड़ा समुदाय बन गया।

स्वामी विवेकानंद ने 25 वर्ष की उम्र में ही गेरुआ वस्त्र धारण कर लिए थे और इसके बाद उन्होंने पैदल ही सम्पूर्ण भारत की यात्राएं की

स्वामी विवेकानंद जी के अनमोल विचार

स्वामी विवेकानंद जी सैद्धांतिक शिक्षा के पक्ष में नहीं थे बल्कि वो एक ऐसी व्यवहारिक शिक्षा के पक्ष में थे जो जिसमे बालक को सम्पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति हो सके। इसलिए उन्होंने हमेशा लार्ड मेकाले की शिक्षा व्यवस्था का विरोध किया। 

उनके अनुसार भारत में अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था युवाओ को पढ़ा-लिखा कर सिर्फ बाबुओं की ही संख्या तैयार कर सकती है। इसके विपरीत वो ऐसी शिखा व्यवस्था के पक्ष में थे जो बालक का सर्वांगीण विकास कर सके।

स्वामी विवेकानंद की मृत्यु (महासमाधि)

स्वामी जी के शिष्यों के अनुसार जीवन के अन्तिम दिन 4 जुलाई 1902 को प्रात: दो तीन घण्टे ध्यान किया और ध्यानावस्था में ही अपने ब्रह्मरन्ध्र को भेदकर महासमाधि ले ली। बेलूर में गंगा तट पर चन्दन की चिता पर उनकी अंतेष्टी की गयी। 

FAQs

Q 1 . विवेकानंद का पहला नाम क्या था?

उत्तर: विवेकानंद का पहला नाम नरेन्द्रनाथ था?

Q 2. स्वामी विवेकानंद का दिमाग इतना तेज क्यों था?

उत्तर: योगसाधना और ब्रह्मचर्य के कारण स्वामी विवेकानन्द का दिमाग बहुत तेज था।

Q 3. विवेकानंद को कितने रोग थे?

उत्तर: ऐसा उल्लेख मिलता है विवेकानंद को 31 प्रकार के रोग थे?

Q 5. स्वामी विवेकानंद कितने घंटे ध्यान करते थे?

उत्तर: स्वामी विवेकानंद प्रतिदिन ध्यान करते थे?

Q 6. स्वामी विवेकानंद जी कैसे व्यक्ति थे?

उत्तर: स्वामी विवेकानंद बचपन से ही बुद्धिमान थे। उनका व्यक्तित्व बहुत ही प्रभावशाली था।

Q. 7 स्वामी विवेकानंद रात में कितने घंटे सोते थे?

उत्तर: स्वामी विवेकानंद रात में 2 से 3 घंटे ही सोते थे?

Q. 8. विवेकानंद को शिकागो जाने में किसने मदद की?

उत्तर: मद्रास के अलसिंगा अयंगर , जिन्होंने रामनाद के राजा, मैसूर के महाराजा, हैदराबाद के निज़ाम और आम लोगों के योगदान से इस यात्रा का आयोजन किया।

Q. 9. विवेकानंद किस लिए प्रसिद्ध है?

उत्तर: स्वामी विवेकानन्द (1863-1902) को संयुक्त राज्य अमेरिका में 1893 विश्व धर्म संसद में अपने अभूतपूर्व भाषण के लिए जाना जाता है, जिसमें उन्होंने अमेरिका में हिंदू धर्म का परिचय दिया और धार्मिक सहिष्णुता और कट्टरता को समाप्त करने का आह्वान किया।

यह लेख ऐतिहासिक संदर्भों, सार्वजनिक स्रोतों और स्वामी विवेकानंद के विचारों पर आधारित है।

अंत में,
स्वामी विवेकानन्द जी ने अपनी गुरू भक्ति, आदर्श विचारों और आध्यात्मिक ज्ञान के द्वारा समाज को जीवन जीने की जो नई राह दिखाई है उसके लिए उन्हें युगों युगों तक याद किया जाता रहेगा।

आपको ये लेख स्वामी विवेकानंद पर निबंध कैसी लगा, कमेंट सेक्शन में अपने अनमोल विचार जरूर प्रकट करें।

आप ये भी पढ़े :

-:स्वामी विवेकानंद जी की जीवनी से सम्बंधित ये पुस्तकें आज ही खरीदें:-
Dhyan tatha Isaki paddhatiyan + Raja Yoga + Bhakti Yoga + Jnana Yoga (Gyan Yog) + Karm Yoga
Kundalini: An untold story
Geeta Aur Krishan-Swami Vivekananda speeches on religion in Hindi
Vishvaguru Vivekananda (Hindi)

Similar Posts

2 Comments

  1. स्वामी विवेकानंद की आध्यात्मिक तरंग प्रेरणा इतनी सी छोटी उम्र मैं दुनिया को आध्यात्मिक जगत की अधभूत अनमोल खोज देकर गए यदि इसका 50फीसदी हिस्सा भी हम खोज ले जीवन नैया एक सुखद परणाम लाएगी हमे साकर्तमक खोज लेकर आनी है।

  2. यूँ स्वामी जी के जीवन परिचय से ज्यादातर लोग परिचित हैं और वह आसानी से इंटरनेट पर उपलब्ध भी है .. लेकिन अगर इंटरनेट पर आभाव है तो वह है सही जानकारी का .. आपने न सिर्फ सही जानकारी को पाठकों के सम्मुख रखा है बल्कि लेख को सुन्दर शब्दों से भी पिरोया है .. यही एक लेखक की विशेषकर ब्लॉगर की खासियत होती है .. आशा है आप आगे भी इसी तरह से महान व्यक्तित्वों का जीवन परिचय युवाओं के सम्मुख रखते रहेंगे और उन्हें प्रेरित करते रहेंगें …
    शुभकामनाये ..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *