Pariyo Ki Kahaniya | परियों की कहानीयाँ बच्चों के लिए हिंदी में



प्यारे दोस्तों, कहानियो के संसार में से आज मैं आपके लिए कुछ ऐसी Pariyo Ki Kahaniya लेकर आया हूँ जिसे पढ़ने में आपको खूब मजा आएगा और साथ ही इसने आपको कुछ प्रेरणा भी मिलेगी। इसलिए आज आप ये Pariyo Ki Kahaniya जरूर पढ़े और अच्छी लगे तो इसे अपने दोस्तों को भी शेयर जरूर करे।

तो आईये ज्यादा देर न करते हुए अब हम कहानियों के संसार में प्रवेश करते है और पढ़ना शुरू करे ये Pariyo Ki Kahaniya.


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Pariyo Ki Kahaniya | परियों की कहानीयाँ बच्चों के लिए हिंदी में


Pariyo Ki Kahaniya :

1 - भाई बहन और परी :

एक समय की बात है एक गांव में दो भाई बहन मोनू और चिंकी रहते थे। वह अपने चाचा चाची के साथ ही रहते थे क्यूंकि कुछ साल पहले उनके माता-पिता का देहांत हो चूका था। उनकी चची उन दोनों बच्चो से चिढ़ती थी और वो उनसे घर का सारा काम करवाती थी और उनको पर्याप्त खाना भी नहीं देती थी।

मगर चाचा उन दोनों बच्चो से खूब प्यार करता था। चाची को ये सब बिलकुल भी पसंद नहीं था और इस कारण अकसर दोनों में लड़ाई भी होती रहती थी। मगर चाचा अपनी पत्नी की ज़िद के आगे बेबस था।
चाची उन दोनों बच्चो को दूर जंगल में जाकर छोड़ना चाहती थी ताकि उनसे छुटकारा मिल सके। इसलिए उसने अपने पति को सारी बात बताई तो चाचा बहुत नाराज हुआ। 


चाची ने उन दोनों बच्चों को जंगल में छोड़ने का प्लान बनाया इसके लिए उसने अपने पति से बात की तो तो वह बहुत नाराज हुआ उसने उसे ऐसा करने से रोकने की बहुत कोशिश की मगर उसकी पत्नी ने उसकी एक न सुनी। उन दोनों की बातों को चिंकी ने चुपके से सुन लिया था।

अगले दिन चाचा चाची दोनों बच्चों को साथ लेकर जंगल में घूमने के बहाने ले गए और रास्ते में खूब मीठी-मीठी बातें की। चिंकी अपनी चाची जी इस चालाकी को पहले ही भाग चुकी थी इसलिए वह अपने साथ कांच की कुछ गोलियां साथ लेकर आयी थी जिन्हे वह रास्ते में बिखेरती जा रही थी।

जंगल में काफी दूर जाने के बाद दोनों बच्चे थक्कर सो गए और चाचा चाची उन्हें उसी हाल में छोड़ कर जंगल में छोड़ कर वापस घर आ गए। शाम हो जाने पर जब दोनों बच्चे नींद से जागे तो उन्होंने अपने आप को अकेला पाया तो वह समझ गए कि क्या हुआ है।


चिंकी ने अपने भाई से कहा कि तुम चिंता ना करो हम घर जरूर पहुंचेंगे, आओ मेरे पीछे पीछे चलो। और वह दोनों अपनी बिछाए हुई कांच की गोलियों को देखते हुए घर की ओर लौट आए।

दोनों को घर पर देखकर आप की चाची आग बबूला हो गई मगर वह चालाकी से उनसे कहने लगी अरे बच्चों तुम जंगल में कहां रह गए थे मैंने तुम्हें बहुत तलाश किया और यहां मैं कितनी परेशान हो रही थी चलो अच्छा हुआ तुम सही सलामत घर लौट आए हो।

चाची अब अपने मन में पहले की अपेक्षा और ज्यादा गुस्से में भरी हुई थी इसलिए अब उन दोनों बच्चों से पहले से ज्यादा काम कर आने लगी और दुख भी देने लगी।

इस बार चाची ने उन दोनों को घर से बहुत दूर जंगल में छोड़ने का प्लान बनाया और अगले दिन फिर अपने पति के साथ मिलकर दोनों को जंगल में घुमाने के बहाने लेकर जाने लगे लगे तो चिंकी को पहले की तरह चाची की चालाकी फिर समझ में आ गयी।

वो जानती थी की चाची इस बार कुछ बड़ी साजिश करना चाहती है लेकिन इस बार चिंकी के पास पहले की तरह कांच की गोलियां नहीं थी और उसकी जगह उसने कुछ चने अपने पास रख लिए और रास्ते में उन्हें बिखेरती जाती।


घने जंगल में पहुंचने के बाद चाची मीठी मीठी बातें करने लगी और उसकी वह मीठी मीठी बातें सुनकर दोनों बच्चों को जल्दी ही नींद आ गई और गहरी नींद में सो गए, सोने के बाद चाची चाचा चाची दोनों बच्चों को वहीं छोड़कर घर आ गए।

शाम को जब दोनों बच्चों की नींद खुली तो उन्होंने घर जाने के लिए फिर वही तरीका आजमाया लेकिन इस बार उन्होंने रास्ते में चने बिखेरे थे उन्हें तो जंगल के पक्षियों ने चुन लिया था अब रास्ता मिले तो कैसे।

इसलिए वह रास्ते की तलाश में इधर उधर भटकने लगे और चलते चलते वह एक खंडहर हमें पहुंच गए और वहां जाकर एक कोने में छुप गए उन्हें काफी डर लग रहा था। थोड़ी देर बाद वहां पर एक भयानक से चेहरे वाली एक बुढ़िया नजर आयी जो उसी घर की ओर आ रही थी।

और जैसे ही वह अंदर पहुंची तो दोनों बच्चे उस बुढ़िया को देखकर डर गए क्यूंकि वह बुढ़िया दिखने में एकदम डरावनी लग रही थी जिसके बड़े बड़े नाखून, बड़ी बड़ी आंखें और बड़े-बड़े बिखरे हुए बाल थे।

उसने बच्चों से कहा तुम यहां क्या कर रहे हो मेरी इजाजत के बिना यहां तुम यहाँ क्या कर रहे हो। अब तुम मेरी कैद में हो इसलिए अगर जान प्यारी है तो जैसा मैं कहती हूं वैसा ही करना होगा नहीं तो मैं तुम दोनों को मार डालूंगी। 

दोनों बच्चे उसकी इस बात से बहुत डर गए और जैसा वह कहती वैसा ही करने लगे। बुढ़िया ने मोनू को एक पिंजरे में कैद कर दिया और लड़की से बहुत काम कराने लगी। एक दिन बुढ़िया ने चिंकी को जंगल में लकड़ियां लेने भेजा। जब चिंकी जंगल में गई तो तो थककर वह एक पेड़ के नीचे बैठ गयी और रोने लगी।

उस पेड़ पर एक परी रहती थी जो उसके मन की बात को समझ गई थी उसने चिंकी को कहा कि "तुम चिंता मत करो, मैं जानती हूं तुम्हारी क्या परेशानी है, लो अब मैं तुम्हें तुम्हारे भाई को उस बुढ़िया की कैद से आजाद कराने का उपाय बताती हूँ ताकि तुम सही सलामत अपने घर लौट सको।


उसके बाद उसने उस परी ने चिंकी को उपाय बताया कि जब वह बुढ़िया सुबह नहाने लगे तब उस पर तुम गरम पानी उड़ेल देना वह बुढ़िया मर जाएगी। उसके बाद उस बुढ़िया की चारपाई में तकिए के नीचे पिंजरे की चाबी है जिससे तुम अपने भाई को आज़ाद करा लेना। इसके बाद उस पिंजरे के निचे रखा मुहरों से भरा संदूक लेकर तुम दोनों पास की नदी किनारे चले जाना। वहां तुम्हे एक हंस दिखाई देगा और वो तुम्हे देखकर अपने पंख फैलाएगा और तुम दोनों उस पर बैठ जाना। हंस तुम दोनों को अपने घर पहुंचा देगा।

यह सुनकर चिंकी बहुत खुश हुई क्यूंकि उसने बचपन में अपनी माँ से कई सारी Pariyo Ki Kahaniya सुन रखी थी कि परिया बहुत दयालु और चमत्कारी होती है। इसलिए अब उसमे हिम्मत भी आ गयी थी।

अगले जब बुढ़िया नहाने बैठी तो चिंकी ने पहले से ही रखा गरम पानी बुढ़िया पर उड़ेल दिया और बुढ़िया तुरंत ही मर गयी। इसके बाद उसने तकिये के नीचे से चाबी निकालकर पिंजरे का ताला खोला और अपने भाई को आजाद करा लिया।

अब दोनों भाई बहन बहुत खुश थे। उन्होंने पिंजरे को हटाकर मुहरों से भरा बक्सा निकाला और उसे लेकर दोनों नदी किनारे जा पहुंचे। वहां पर वास्तव में एक हंस पानी में तैरता दिखा और जब वह उसके पास गए तो हंस ने अपने पंख फैला लिए। इसके बाद दोनों हंस की पीठ पर बैठ गए और हंस ने उन्हें उनके घर पहुंचा दिया।

वहां पर दोनों बच्चो को देखकर चाचा को बहुत ख़ुशी हुई और दोनों को गले लगाकर वो खूब रोये। उन्होंने दोनों से क्षमा मांगी और कहा कि तुम्हारे जाने के बाद मैंने तुम्हारी चाची को घर से बाहर निकाल दिया है।

यह सुनकर दोनों बच्चों को बहुत दुःख हुआ और उन्होंने मुहरों का संदूक अपने चाचा को देकर बोला कि उन्हें चाची के बिना ये घर सूना सूना सा लग रहा है और फिर वो दोनों घर के घर के बाहर चबूतरे पर बैठी अपनी चाची को हाथ पकड़कर घर ले आए।

ये देखकर चाची खूब रोई और दोनों बच्चों को गले लगाकर उनसे क्षमा मांगी। इसके बाद अब वो दोनों बच्चो से खूब प्यार करने लगी और उनकी माँ बनकर रहने लगी।


2 - लालची लकड़हारा

एक गांव में चंगू मंगू नाम के दो भाई रहते थे, दोनों जंगल से लकड़ियां काटकर बेचा करते थे और अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। रोजाना की तरह एक दिन चंगू जंगल में लकड़ी काटने गया और वहां नदी किनारे एक ऊंचे पेड़ पर बैठकर लकड़ी काटने लगा। तभी लकड़ी काटते समय चंगू के हाथ से कुल्हाड़ी छूटकर नदी में जा गिरी।

नदी का पानी गहरा था और चंगू को तैरना भी नहीं आता था इसलिए अब वह क्या करें वह दुखी होकर बैठ गया। अब उसके पास दूसरी कुल्हाड़ी भी नहीं थी जिससे वह लकड़ी काट पाता। तभी वहां एक जलपरी प्रकट हुई और उसने चंगू से कहा की चिंता मत करो, मैं तुम्हारी कुल्हाड़ी अभी ढूंढ कर लाती हूं और थोड़ी देर बाद जलपरी पानी में से एक चमचमाती चांदी की कुल्हाड़ी निकाल कर लाई और चंगू से कहा कि क्या यह कुल्हाड़ी तुम्हारी है।


तो चंगू ने कहा कि नहीं नहीं यह कुल्हाड़ी मेरी नहीं है इस पर परी ने फिर पानी में डुबकी लगाई और इस बार है चमचमाती सोने की कुल्हाड़ी लेकर प्रकट हुई और कहा क्या यही तुम्हारी तुम्हारी कुल्हाड़ी है तो इस बार भी चंगू ने मना कर दिया तो परी फिर पानी में गई और इस बार वह लोहे की कुल्हाड़ी लेकर आई और उसने कहा क्या यह तुम्हारी खिलाड़ी है तो चंगू अपनी कुल्हाड़ी को देखते ही पहचान गया और कहा - "हां यही है मेरी कुल्हाड़ी"

इस पर जलपरी बहुत खुश हुई और चंगू की ईमानदारी पर खुश होकर उसने सोने चांदी और लोहे की कुल्हाड़ी तीनों को लड़ियां तीनों कुल्हाड़ी आ चंगू को दे दी और झमरु खुशी खुशी अपने घर आ गया।

घर आकर चंगू ने यह बात अपनी पत्नी को बताई कि अब वह धनवान बन चुकी है। थोड़े दिन बाद मंगू की पत्नी चंगू की पत्नी का बदला हुआ रूप देखकर उससे ईर्ष्या करने लगी और एक दिन मंगू की पत्नी ने चालाकी से चंगू की पत्नी से उसका कारण पूछा तो चंगू की पत्नी में मंगू की पत्नी को सारी बात बता दी और यह बात मंगू की पत्नी ने रात में अपने पति को बताई।

अब मंगू ने भी वैसा ही करने का सोचा। अगले दिन वह भी नदी किनारे जाकर पेड़ पर चढ़कर लकड़ी काटने लगा और लकड़ी काटते काटते उसने जानबूझकर खिलाड़ी को कुल्हाड़ी को नदी में फेंक दिया और वह भी दुखी होने का नाटक करके बैठ गया।

थोड़ी देर में वह जलपरी फिर प्रकट हुई और मंगू से कहा कि उसे क्या दुख है तो उसने बताया कि उसके पास एक ही कुल्हाड़ी है और वह भी पानी में गिर गई है और अब वह क्या करें तो जलपरी ने कहा -"तुम चिंता ना करो, मंगू मैं अभी लाती हूँ तुम्हारी कुल्हाड़ी और वह पानी में गई और अपने साथ एक चमचमाती सोने की कुल्हाड़ी लेकर प्रकट हुई।

यह देख कर मंगू ने कहा हाँ हाँ यही है मेरी कुल्हाड़ी। जलपरी मंगू के लालच को भाप गई और कहा की लालची मंगू मैं तुम्हारी बात को अच्छे से समझ गई हूँ, तुम लालची हो इसलिए तुम ने जानबूझकर कुल्हाड़ी पानी में फेंक दी और अब सोने की कुल्हाड़ी को तुम अपना बता रहे हो, जाओ अब मैं तुम्हें कोई कुल्हाड़ी नहीं देने वाली, तुम्हारी असली कुल्हाड़ी भी नहीं।

उसके बाद मंगू के पास पछताने के सिवा अब कुछ नहीं बचा और अब उसे अपनी लालच की सजा मिल चुकी थी।

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अंत में,
तो प्यारे दोस्तों, आपको ये Pariyo Ki Kahaniya कैसी लगी और क्या आपको ऐसी ही और भी कहानिया पढ़ना पसंद है तो आप हमे अभी कमेंट करके जरूर बताये और साथ ही इसे अपने दोस्तों को भी शेयर जरूर करे।

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