5 नयी प्रेरक कहानियाँ बच्चों के लिए | 5 new moral stories in Hindi



प्यारे दोस्तों! कहानियां पढ़ना सबको पसंद आता है चाहे वो बच्चे हो या फिर बड़े-बूढ़े, किस्से-कहानियाँ पढ़ना किसे अच्छा नहीं लगता है क्यूंकि हर एक कहानी हमे कोई न कोई सीख जरूर देती है। इसलिए अगर आप किस्से -कहानियाँ पढ़ने के शौकीन है आप ये कहानी संग्रह (5 new moral stories in Hindi) जरूर पढ़े। 

आज हम आपके लिए कुछ ऐसी ही 5 प्रेरक कहानियों का संग्रह (5 new moral stories in Hindiलेकर आये है जो आपको काफी पसंद आएगी साथ ही जिन्हे पढ़कर आपको कुछ न कुछ शिक्षा जरूर मिलेगी। 

1 . क्रोध और नियंत्रण 


एक बार की बात है एक राजा घने जंगल में भटक गया। सही रास्ते की तलाश में घंटो भटकने के बाद वो थक गया और प्यास के कारण व्याकुल होने लगा। तभी उसकी नज़र एक बड़े से पेड़ पर पड़ी जहाँ पर एक डाली से टप टप करती पानी की छोटी-छोटी बूंदे गिर रही थी।

तभी राजा ने एक पानी पीने का एक उपाय निकाला और पेड़ के पत्तों का एक दोना बनाकर उसमे पानी इकठ्ठा किया।  राजा जैसे ही पानी पीने लगा तभी एक तोता आया और झपट्टा मार कर दोने को गिरा दिया।

उसके बाद राजा फिर से उस खाली दोने को भरने लगा। काफी देर बाद फिर से भर गया। राजा ने हर्षचित्त होकर जैसे ही दोने को उठाया तो तोते ने वापस उसे गिरा दिया।


तोते की इस हरकत से राजा क्रोधित हो उठा और उसने चाबुक उठाकर तोते पर जोरदार वार किया और तोते के प्राण पखेरू उड़ गए।

अब राजा ने सोचा की अब मैं आराम से पानी इकठ्ठा कर अपनी प्यास बुझा पाउँगा। यह सोचकर वह डाली के वापस पानी इकठ्ठा होने वाली जगह पहुंचा तो उसके पांव के नीचे की जमीन खिसक गयी।

क्यूंकि उस डाली पर तो एक जहरीला सांप सोया हुआ था और उस सांप के मुँह से लार टपक रही थी। राजा अब तक जिसको पानी समझ रहा था वह सांप की जहरीली लार थी।

यह देखकर राजा का मन ग्लानि से भर गया। उसने कहा काश मैंने संतों के बताये उत्तम क्षमा मार्ग को धारण कर क्रोध पर नियंत्रण किया होता तो ये मेरे हितैषी निर्दोष पक्षी की जान नहीं जाती।

कहानी से शिक्षा:
क्रोध की स्थिति में निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें। 



2 . मुमकिन 

एक तालाब में बहुत सारे मेंढक रहते थे। उस तालाब के बीचो-बीच एक बड़ा सा लोहे का खंबा भी था 1 दिन मेंढ़को ने तय किया कि जो भी इस खम्बे पर चढ़ेगा वह विजेता माना जाएगा। रेस का दिन आ गया प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वहां कई सारे मेंढक इकट्ठे हुए। 

चारों ओर शोर ही शोर था, सब उस लोहे के बड़े से खंबे को देखकर कहने लगे। अरे खंबे पर चढ़ना तो नामुमकिन है! बार-बार कोशिश करने के बाद भी कोई ऊपर खंबे पर नहीं पहुंच पा रहा था। 

उनमे से एक छोटा मेंढक लगातार कोशिश करने के कारण खंबे पर जा पहुंचा। हालांकि वह भी कई बार गिरा उठा लेकिन प्रयास करता है। आखिरकार वह खंभे पर चढ़ने में सफल हुआ। 

उसको विजेता देख अन्य मेंढ़को ने सफलता का कारण पूछा, तभी पीछे से एक मेंढक की आवाज आती है, अरे उससे क्या पूछते हो वह तो बहरा है। 

फिर भी मेंढ़कों ने विजेता मेंढक से पता करने के लिए एक ऐसे मेंढक की मदद ली जो उसकी सफलता का कारण जान सके। 



विजेता मेंढक बोला - "मैं बहरा हूं मुझे सुनाई नहीं देता लेकिन जब आप लोग जोर जोर से चिल्ला रहे थे तो मुझे लगा जैसे आप लोग मुझसे कह रहे हो कि तुम यह कर सकते हो, यह तुम्हारे लिए मुमकिन है तो मैंने ऐसा मान लिया कि मैं कर सकता हूं और नतीजा आपके सामने है।" 

कहानी से शिक्षा:
खुद पर यकीन हो तो सबकुछ मुमकिन है। 



3 . नकल में अकल 


एक पहाड़ की चोटी पर एक गरुड़ रहता था। उसी पहाड़ की तलहटी में एक विशाल वृक्ष था, जिस पर एक कौआ अपना घोंसला बनाकर रहता था। 


तलहटी के आसपास के गांवों में रहने वाले पशु पलकों ही भेड़-बकरियां चरने आया करती थी। जब उनके साथ उनके मेमने भी होते तो गरुड़ प्रायः उन्हें अपना शिकार बना लेता था। 

रोज यह देखकर एक दिन कौए को भी जोश आ गया। उसने सोचा कि यदि गरुड़ ऐसा पराक्रम कर सकता है तो मैं क्यों नहीं कर सकता ? आज मैं भी ऐसा ही करूंगा। 

उसने भी गरुड़ की तरह हवा में जोरदार उड़ान भरी और आसमान में जितना ऊपर तक जा सकता था उड़ता चला गया। 


फिर तेजी से नीचे की ओर आकर गरुड़ की भांति झप्पटा मारने की कोशिश की, किन्तु इतनी ऊंचाई से हवा में गोता लगाने का अभ्यास न होने कारण वह मेमने तक पहुँचने की बजाय एक चट्टान से जा टकराया 

जिससे उसका सिर फूट गया, चोंच टूट गयी और कुछ ही देर में उसकी मृत्यु हो गई।  


कहानी से शिक्षा:
अपनी स्थिति और क्षमता पर विचार किए बिना किसी की नकल नहीं करनी चाहिए। 



4 . जियो जिंदगी 

एक नगर में एक धनवान व्यक्ति रहता था। वह बड़ा विलासी प्रकृति का था एक दिन संयोग से किसी संत से उसका संपर्क हुआ। अपने भविष्य के प्रति जिज्ञासा दिखाते हुए उसने संत से अपने बारे में भविष्य बताने आग्रह किया। 

संत ने उसका हाथ देखते हुए कहा, 'तुम्हारे पास समय बहुत कम है। आज से एक माह बाद तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी। जो कुछ अच्छा करना है कर लो।' 

भोगी चिंता में सभी से अच्छा व्यवहार करने लग गया। जब एक दिन बचा तो उसने सोचा कि चलो एक बार संत के दर्शन को कर लिए जाए ताकि शांति से आंखें मून सकू। 

संत ने उसे आते देखकर पूछा कि बड़े शांत नजर आ रहे हो, क्या बात है? व्यक्ति बोला 'अब अंतिम समय में जब मृत्यु समक्ष हो तो भोग विलास कैसा ' 


संत हंस दिए और बोले, 'वत्स, चिंता मत करो और भोग विलास से दूर रहने का एकमात्र उपाय यही है की मृत्यु को सदैव याद रखो, मृत्यु निश्चित है, यह विचार सदैव सन्मुख रखना चाहिए और उसी के अनुसार प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करना चाहिए, हर पल को जीना चाहिए।' 

अब उस व्यक्ति को संत की बात अच्छी तरह से समझ में आ गई थी


कहानी से शिक्षा:
सदैव अच्छे कर्म करो और हर पल ख़ुशी से जीना चाहिए। 


5 . संतुष्टि 

एक बार भगवान बुद्ध के शिष्य आनंद ने पूछा 'भगवान जब आप प्रवचन देते हैं तो सुनने वाले नीचे बैठते हैं और आप ऊँचे आसन पर बैठते है ऐसा क्यों?' 

भगवान बुध बोले 'यह बताओ कि पानी झरने की ऊपर खड़े होकर पिया जाता है या नीचे जाकर आनंद ने उत्तर दिया झरने का पानी नीचे गिरता है उसके नीचे जाकर ही पानी पिया जा सकता है।' 

भगवान बुद्ध ने कहा तो फिर प्यासे को संतुष्ट करना है झरने को ऊंचाई से ही बहना होगा। आनंद ने हां में उत्तर दिया।

भगवान बुद्ध यह सुनकर भगवान बुद्ध बोले, 'आनंद! ठीक इसी तरह यदि तुम्हें किसी से कुछ पाना है तो स्वयं को नीचे लाकर ही प्राप्त कर सकते हो और तुम्हें देने के लिए दाता को भी ऊपर खड़ा होना होगा।'

यदि तुम समर्पण के लिए तैयार हो तो तुम एक ऐसे सागर में बदल जाओगे जो ज्ञान की सभी धाराओं को अपने में समेट लेता है। 

भगवान बुद्ध ने फिर कहां कि इतिहास गवाह है कि वही लेने वाला सबसे ज्यादा फायदे में रहता है जो पूर्ण समर्पण और विश्वास के साथ पाना चाहता है जबकि अविश्वास के साथ पाने की इच्छा रखने वाला हमेशा स्वयं को रिक्त ही महसूस करता है। 


कहानी से शिक्षा:
पूर्ण समपर्ण और विश्वाश के साथ कुछ भी पाया जा सकता है। 


और आखिर में,

यह कहानी आपको कैसे लगी और इसके बारे में आपके क्या विचार है यह हमे कमेंट करके जरूर बताएं। साथ ही इस कहानी को अपने दोस्तों में शेयर जरूर करे। धन्यवाद।

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