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Top 10 Moral Stories in Hindi | Short Story in Hindi with Moral

प्यारे दोस्तों! कैसे हैं आप सब लोग? मुझे उम्मीद हैं कि आप हमेशा की तरह अच्छे ही होंगे। दोस्तों मुझे पता हैं कि आप सभी को रौचक कहानियाँ पढ़ना पसंद हैं इसलिए आज मैं फिर से लेकर हाजिर हूँ top 10 moral stories in hindi, short story in hindi with moral

उम्मीद करता हूँ कि आपको आज की ये नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ जरूर पसंद आएंगी। तो फिर देर किस बात की आईये शुरू करते हैं कहानियों का रौचक सफर और पढ़ते हैं top 10 moral stories in hindi, short story in hindi with moral

Top 10 Moral Stories in Hindi | Short Story in Hindi with Moral

-: गधे की हँसी :-

एक बार जंगल में सभी जानवरों की मीटिंग हुई। उसमें जंगल के लगभग सभी जानवरों ने हिस्सा लिया उसमें एक गधे ने भी हिस्सा लिया था। मीटिंग के दौरान कुछ ऐसी बात हुई कि सभी जानवर एकदम से ठहाका मारकर हंसने लगे। परन्तु गधा बिल्कुल भी नहीं हँस रहा था बल्कि वो सभी की तरफ गर्दन घुमा घुमा के देख रहा था।

ये देखकर बाकि जानवर गधे को देखने लगे और सोचने लगे कि सब तो हँस रहे हैं और ये गधा बिल्कुल भी नहीं हँस रहा हैं। आखिर ऐसी क्या बात हैं? उसके बाद मीटिंग खत्म हो गयी और सब अपने अपने घर को चले गए।

अगले दिन वो गधा एक खेत में घास चरते हुए अकेला ही जोर जोर से हंस रहा था। उसे इस तरह हँसता हुआ देखकर बाकि जानवर आश्चर्य में पड़ गए कि ये गधा अकेला ही इस तरह क्यों हंस रहा हैं।

इसका कारण जानने के लिए जब उन्होंने उस गधे से पुछा तो गधे ने जवाब दिया – ” अरे मैं तो कल मीटिंग वाली बात पर हंस रहा हूँ। दरअसल वो कल वाली बात मुझे अब समझ में आ गयी हैं।” इसके बाद गधा फिर से हंसने लगता हैं।

इसके बाद जंगल के जानवर भी गधे की इस मूर्खता पर जोर जोर से हँसते हुए वहां से चले गए।

कहानी से शिक्षा : मुर्ख लोगों को कोई भी बात आसानी से समझ नहीं आती हैं।

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-: चिड़िया और बंदर :-

एक समय की बात हैं। एक पेड़ पर एक नन्ही सी चिड़िया घोंसला बनाकर रहती थी। उस पेड़ पर एक बंदर भी रहता था जो बहुत शरारती था। एक दिन खूब जोर की बारिश होने लगी। इस दौरान चिड़िया अपने घोंसले में जाकर बैठ गयी। तभी उसने देखा कि बंदर उस तेज बारिश में भीग रहा हैं।

बंदर को भीगता हुआ देखकर चिड़िया से रहा नहीं गया और वो बंदर से बोली – बंदर भाई! तुम बारिश में क्यों भीग रहे हो? जाकर कहीं छुपते क्यों नहीं?

बंदर बोला – मैं तो हमेशा पेड़ों पर ही रहता हूँ। ये ही मेरा घर हैं।

चिड़िया बोली – तो तुम अपने लिए घर क्यों नहीं बना लेते मेरी तरह?

बंदर चिढ़ते हुए बोला – मेरी मर्जी मैं कैसे भी रहूँ। और मुझे तुम्हारी सलाह की कोई आवश्यकता नहीं है।

चिड़िया थोड़ी देर चुप रही लेकिन फिर उससे रहा नहीं गया। उसने बदंर से फिर कहा – बातें बनाना तो कोई तुमसे सीखें। सच पूछो तो तुम्हें शर्म आनी चाहिए जो अपने भले बुरे की भी नहीं सोचता।

तभी बंदर को इस बात पे बहुत गुस्सा आया और उसने चिड़िया के घोंसले को तोड़ डाला। उसने अब चिड़िया को भी बेघर कर दिया।

कहानी से सबक – कभी भी किसी को बिना मांगे कोई सलाह नहीं देनी चाहिए।

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-: दो भाई और एक गधा :-

एक गांव में राम और श्याम नाम के दो भाई रहते थे। उनमें से एक भाई के पास एक गधा भी था। एक दिन श्याम ने अपने भाई राम से कहा – भाई, मुझे आज शहर में गाजर लेकर जाना हैं। क्या तुम मुझे आज एक दिन के लिए अपना गधा उधार दे सकते हो?

हां भाई, क्यों नहीं – दूसरे भाई ने कहा।

उसने फिर कहा – अरे, मुझे भी शहर तक जाना हैं चलो हम दोनों साथ चलते है।

इसके बाद दोनों भाई शहर की ओर चल पड़ते है। चलते चलते वो एक रेगिस्तान में पहुँच जाते हैं। इधर तेज गर्मी के कारण दोनों भाई परेशान हो रहे थे। वो थोड़ी देर छांव में रुककर आराम करना चाहते थे। लेकिन वहाँ एक भी पेड़ का नामो निशान नहीं था।

तभी एक भाई गधे की छाँव में जाकर बैठ जाता हैं। ये देखकर दूसरा भाई बोला – अरे भाई, ये गधा मेरा हैं मैं इसका मालिक हूँ। इसलिए मैं इसकी छाँव में बैठूंगा।

दूसरा भाई बोला – लेकिन भाई, मैंने आज के लिए इसे उधार लिया हैं। इसलिए आज के लिए इसका मालिक मैं हूँ। और मैं ही इस गधे की छांव में बैठूंगा।

ये कहकर दोनों भाई झगड़ने लगे।

दोनों भाईयों को इस तरह झगड़ते हुए देखकर गधे ने सोचा – “ये दोनों भाई कितने स्वार्थी हैं। दोनों मेरी छांव में बैठना चाहते हैं लेकिन किसी को भी मेरी परवाह नहीं हैं। अब मुझे इन दोनों को सबक सिखाना चाहिए।

तभी गधे ने देखा कि उसकी पीठ पर रसीली गाजर बंधी हुई हैं। ये देखकर गधा के दिमाग में एक आईडिया आया और दोनों भाईयों को लड़ते हुए मौका पाकर वहां से भाग गया।

गधे को भागता हुआ देखकर दोनों भाई हाथ मलते रह गए और अब उनके पास पछतावा करने के शिव कुछ नहीं बचा।

कहानी से सबक – हमें छोटी छोटी बातों के लिए कभी नहीं लड़ना चाहिए इससे बड़ा नुकसान हो जाता है।

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-: कुत्ते की चालाकी :-

एक समय की बात है। एक कुत्ता जंगल में से होकर गुजर रहा था। तभी उसने एक शेर को अपनी तरह आता हुआ देखा। ये देखकर कुत्ता बेहद डर गया और बचने का कोई उपाय सोचने लगा। तभी उसके दिमाग में एक आईडिया आया।

Top 10 Moral Stories in Hindi | Short Story in Hindi with Moral
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उसने पास की पड़ी कुछ हड्डिया चबाना शुरू कर दिया और शेर की तरफ पीठ करके जोर जोर से कहने लगा। “आज तो शेर का माँस खाकर बहुत मजा आया। सचमुच शेर का माँस तो बड़ा ही स्वादिष्ट होता हैं। अगर एक और शेर खाने को मिल जाये तो मज़ा ही आ जाये।

शेर ने जब ये बात सुनी तो उसने मन ही मन सोचा – “अरे ये कुत्ता हैं या कोई और। इसने तो शेर को भी नहीं छोड़ा। और ये तो अब एक और शेर को खाने की सोच रहा है रहा है। अगर मैं इसके पास गया तो कहीं ये मुझे भी मारकर न खा जाये। इसलिए अब यहाँ से भागने में भलाई है।”

और ये सोचकर शेर उल्टे पाँव भागने लगा। पास ही एक पेड़ पर बैठा बंदर ये नजारा देख लेता है। शेर को इस तरह डरकर भागते हुए देखकर बंदर से रहा नहीं गया और वो शेर का पीछा करने लगा।

थोड़ी दूर जाकर बंदर ने भागते हुए शेर से कहा- “अरे महाराज, आप इस तरह डरकर भाग क्यों रहे हैं। उस कुत्ते ने झूठ बोला था और वो आपको डरा रहा था। मेरा यकीन करो और उस कुत्ते को सबक सिखाओ।”

शेर बोला – “ये तुम क्या बोल रहे हो। मैंने उसे अपनी आँखों से मांस खाते हुए देखा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम मुझे बेवकूफ तो नहीं बना रहे हो?”

बंदर बोला – महाराज, आप एक बार मेरे साथ चलिए आपको सारी बात समझ आ जाएगी।

बंदर की बात मानकर शेर फिर से उसी जगह जा पहुँचा। शेर और बंदर को साथ आता देखकर कुत्ता फिर से बहुत ज्यादा डर गया। लेकिन फिर भी वो हिम्मत करके जोर जोर से कहने लगा – ” इस बंदर को मैंने शेर को बुलाकर लाने को कहा था और देखो अभी तक वापस नहीं आया। वापस आने दो आज इसको शेर के साथ ही कच्चा चबा जाऊंगा।”

कुत्ते की ये बात शेर ने फिर से सुनी तो इस बार शेर बहुत ज्यादा घबरा गया और वो बंदर को कहने लगा – ” तुमने मुझे धोखा दिया है। तुम मुझे इस कुत्ते का खाना बनाकर लाये हो। मैं तुझे इसकी सजा जरूर दूंगा।”

ये कहकर शेर ने फिर से वहां से भाग जाने में ही अपनी भलाई समझी।

कहानी से शिक्षा: मुसीबत में हिम्मत और समझदारी से काम लेना चाहिए।

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-: मुर्ख गधा :-

एक व्यापारी के पास एक गधा था। वह रोज अपने उस गधे के ऊपर शक्कर भी बोरी लादकर बाज़ार तक ले जाता और बाजार में उसे बेचकर खूब पैसा भी कमाता।

इधर रोज रोज बोझा ढोकर गधा परेशान होने लगा। अब उसे एक उपाय सुझा। अब जब भी व्यापारी शक्कर की बोरी उस गधे पर लादकर ले जाता तो गधा नदी के बीच में पानी में जाकर कुछ देर बैठ जाता। इससे पूरी शक्कर पानी में घुलकर बाह जाती और गधे का बोझ भी कम हो जाता।

इस तरह अब गधा हर रोज ऐसा ही करता। इधर व्यापारी गधे की इन हरकतों से परेशान होने लगा। अब उसने गधे को सबक सिखाने की सोची।

और अगले दिन गधे पर शक्कर की जगह रुई की बोरी लाद दी। गधे को रुई की बोरी बहुत हल्की लगी तो वो मन ही मन बहुत खुश हुआ। उसने सोचा कि व्यापारी को सबक मिल चूका है। इसलिए अब उसने बोझ बिल्कुल कम ही कर दिया है। चलो अब ख़ुशी ख़ुशी चलते है।

थोड़ी दूर जाने के बाद वो नदी तक पहुंचा और अपनी पुरानी आदत के अनुसार झट से पानी में जाकर बैठ गया। इससे बोरी में रखी हुई सारी रुई पानी से भीग गयी।

थोड़ी देर बाद जब गधा पानी से बाहर निकला तो उसे उठा ही नहीं जा रहा था क्योंकि रुई पानी भीगकर भारी हो गयी थी। अब व्यापारी गधे को जोर जोर से डंडो से पीटने लगा। पिटाई खाकर गधा समझ गया कि ये उसके कर्मों का ही फल है।

कहानी से शिक्षा : किसी भी काम को पूरी ईमानदारी से करना चाहिए।

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-: चार दोस्त और भालू :-

एक बार दो मित्र गांव से शहर की ओर जा रहे थे। जब रास्ते में वो एक घने जंगल से गुजर रहे थे तभी एक जने को बड़ा सा भालू अपनी तरफ आता दिखाई दिया। ये देखकर वो आदमी तुरंत पेड़ पर चढ़ गया।

लेकिन उसका दोस्त नीचे ही रह गया। उसे जब इस बात का पता चला तो उसने भालू से भचने का एक उपाय सोचा और वो तुरंत साँस रोककर चुपचाप जमीन पर लेट गया।

जब भालू उसके पास आया उसने उस आदमी को काफी देर तक सूंघ सूंघ कर देखा। तभी भालू को लगा कि वो व्यक्ति तो मरा हुआ हैं और वो उसे वही छोड़कर वहां से चला गया।

इसके बाद ऊपर पेड़ पर चढ़ा हुआ उसका दोस्त नीचे उतरा और उसने अपने दोस्त से पूछा कि भालू तुम्हारे पास आकर कान में क्या कह रहा था।

दूसरे दोस्त ने उत्तर दिया – ” हां उसने मेरे कान में कहा कि धोकेबाज दोस्तों से दूर रहो।”

कहानी से शिक्षा : जो मुसीबत में काम आये वही सच्चा मित्र होता है।

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-: सच्ची मित्रता :-

एक घने जंगल में एक बड़े से पेड़ पर चिड़िया घोंसला बनाकर रहती थी। उस पेड़ के किनारे से एक नदी भी गुजरती थी। एक दिन उसने देखा कि एक नन्ही सी चिंटी नदी के पानी में बहती हुई जा रही थी।

ये देखकर चिड़िया परेशान हो गयी और उसकी जान बचाने का उपाय सोचने लगी। तभी उसने जमीन पर पड़ा एक सूखा सा पेड़ का पत्ता उठाया और उसे नदी के पानी में उस चिंटी के पास गिरा दिया। इसके बाद चिंटी उस सूखे पत्ते पर चढ़ गयी और उसकी जान बच गयी।

कुछ दिनों बाद उस जंगल में एक शिकारी आया और उस पेड़ के पास आकर उस चिड़िया को मारने के लिए निशाना लगाने लगा। जब ये बात चिंटी को पता चली तो वो शिकारी के पास गयी और उसके पैर में जोर से काट लिया।

इससे शिकारी को तेज दर्द होने लगा जिससे उसका निशाना चूक गया और चिड़िया की जान बच गयी।

कहानी से शिक्षा : किसी पर किया गया उपकार व्यर्थ नहीं जाता।

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-: चार बेल और शेर :-

एक जंगल में चार हस्टपुष्ट बैल रहते थे। वे चारों आपस में गहरे मित्र थे और हमेशा एक साथ हिओ रहते थे। ये बात जंगल के राजा शेर को बहुत खटकती थी। वो चारों बैलों को ललचायी निगाहों से देखा करता था और उन्हें मार कर खाना चाहता था।

लेकिन चारों के एक साथ रहने के कारण उसका ये दांव काम नहीं कर पा रहा था। इसलिए उसने एक षड्यंत्र रचा। इसके बाद जब भी शेर किसी बैल को अकेला देखता तो वो उसके पास जाता और कहता कि “तुम तो बड़े सुंदर और हस्टपुष्ट हो। लेकिन तुम्हारे दोस्त तो तुम्हें अकेला छोड़कर एक बहुत अच्छी जगह पे घास खाने जाते हैं। इसके आलावा पीठ पीछे वो तुम्हारी बुराई भी करते रहते हैं। क्या तुम्हें अब भी ऐसे लोगों के साथ दोस्ती पसंद हैं?”

इसके बाद शेर ये ही बात एक एक करके बाकि सभी बैलों के पास गया और उन्हें इस तरह भड़काया। शेर की बात सुनकर सभी बैलों के मन में एक दूसरे के प्रति नफरत पैदा होने लगी और वो एक अलग अलग रहने लगे।

इसके बाद मौका पाकर शेर ने एक एक करके सभी बैलों को मार दिया और उन्हें खा गया।

कहानी से शिक्षा : संगठन में शक्ति होती हैं।

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-: साँप और नेवला :-

एक गांव में एक दम्पति रहते थे। उनका एक छोटा सा पुत्र था। उन्होंने अपने घर में एक नेवला भी पाल रखा था। एक दिन दम्पति किसी काम से घर से थोड़े समय के लिए बाहर गए हुए थे और घर में उनका बच्चा अकेला था।

कुछ देर बाद नेवले ने देखा कि बड़ा सा जहरीला सांप घर के अंदर आ रहा था और बच्चे की तरह बढ़ने लगा। तभी नेवला उस सांप के ऊपर झपट पड़ा और काफी देर तक चले संघर्ष के बाद सांप ने नेवले को मार गिराया और सांप के टुकड़े टुकड़े कर डाले।

इसके बाद नेवला घर के दरवाजे के बाहर जाकर बैठ गया। सांप को मारने के कारण नेवले के मुँह पर काफी सारा खून लग गया था। थोड़ी देर बाद जब दम्पति वापस घर आये तो उन्होंने नेवले के मुँह को खून से सना हुआ देखा।

नेवले के मुँह पर खून देखकर दम्पति को कुछ शक हुआ और उन्होंने सोचा कि नेवले ने उनके बच्चे को अकेला पाकर मार डाला हैं। इसलिए गुस्से में आकर उन्होंने नेवले को डंडे से पीट पीट कर मार डाला।

इसके बाद जब उन्होंने घर के अंदर जाकर देखा तो उनके होश उड़ गए। क्योंकि अंदर बड़ा सा जहरीला सांप मरा पड़ा था और अंदर उनका बच्चा बिल्कुल सुरक्षित सो रहा था। ये सब देखकर दम्पति को पूरा माजरा समझते देर नहीं लगी। लेकिन अब उन्हें अपने किये पर बहुत पछतावा भी हो रहा था।

कहानी से शिक्षा : बिना सोचे समझे कभी भी कोई काम नहीं करना चाहिए।

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-: भेड़िया आया :-

एक गांव में रामु नाम का एक लड़का रहता था। वह भेड़ बकरिया चराया करता था। एक दिन जब वह पहाड़ी पर अपनी भेड़ बकरियां चरा रहा था तभी अचानक उसे एक शरारत सूझी।

अचानक वो जोर जोर से चिल्लाने लगता हैं – “भेड़िया आया, भेड़िया आया। कोई बचाओ! भेड़िया मेरी बकरियों को मार रहा हैं।”

रामु की आवाज सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे कुछ ग्रामीण उसकी ओऱ आये। जब वे वहां गए तो रामु जोर हसने लगता है।

रामु को हँसता हुआ देखकर सभी ग्रामीणों ने उससे भेड़िये के बारे में पुछा तो रामु ने फिर हँसते हुए कहा – ” मैं तो बस यूँ ही मजाक कर था। असल में यहाँ कोई भेड़िया नहीं आया।”

रामु की बात सुनकर सभी गांव वालों ने चैन की साँस ली और भगवान का शुक्रिया करते हुए वहां से चले गए।

अगले दिन रामु फिर से जोर जोर से चिल्लाना शुरू कर देता हैं – “बचाओ, बचाओ भेड़िया आया, भेड़िया आया।

रामु की आवाज सुनकर ग्रामीण फिर से उसके पास गए तो रामु जोर का ठहाका लगाकर हंसने लगा और कहा -” अरे मैं तो मजाक कर रहा था। असल में मैं देखना चाहता था कि मेरी मदद करने के लिए कोई आता है या नहीं।”

इस बार रामु की बात सुनकर ग्रामीणों को बहुत गुस्सा आया और वो वहां से चले गए।

इसके बाद कुछ दिनों तक रामु इसी तरह की हरकते करता रहा ग्रामीण उसकी मदद के लिए आते रहे।

एक दिन रामु जब उसी पहाड़ी पर बकरियां चरा था तभी अचानक सचमुच एक भेड़िया आ गया और कुछ बकरियों को मारने लगा।

इस बार सचमुच का भेड़िया देखकर रामु बेहद डर जाता हैं और जोर जोर से चिल्लाता है -” अरे कोई मेरी भेड़ों को बचाओ। आज तो सचमुच का भेड़िया आया है। बचाओ बचाओ!!

इस बार भी गांव वालों ने रामु की आवाज सुनी लेकिन उन्हें लगा कि रामु आज फिर से उनके साथ मजाक कर है। इसलिए इस बार कोई भी रामु की मदद करने नहीं आया।

देखते देखते ही देखते भेड़िये ने रामु की सभी भेड़ और बकरियों को मार डाला। रामु अब जोर जोर से रोने लगा तो गांव वाले उसके पास आये। वहां का नजारा देखकर सभी के होश उड़ गए। भेड़िये ने सभी भेड़ों और बकरियों को मार डाला था।

इधर रामु चुपचाप बैठकर रो रहा था और अपने किये पर पछता रहा था।

कहानी से शिक्षा : कभी भी बेवजह मजाक नहीं करना चाहिए इससे हम अपनी विश्वश्नीयता खो देते हैं।

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Rakesh Verma

Rakesh Verma is a Blogger, Affiliate Marketer and passionate about Stock Photography.

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