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बेवकूफ गधा | 5 Best हास्य कहानियाँ हिंदी में

प्यारे दोस्तों कैसे हो आप सब? उम्मीद करता हूँ आप सब मजे कर रहे होंगे। दोस्तों आज मैं आपके लिए बेहद अनोखी हास्य कहानियाँ लेकर आया हूँ जिनको पढ़कर आपको सच में बहुत ही ज्यादा मजा आने वाला हैं।

तो फिर देर किस बात की ! आईये शुरू करते है मजेदार कहानियों का रौचक सफर।

बेवकूफ गधे की 5 हास्य कहानियाँ हिंदी में

1. गधा और ऊँट

एक समय की बात है। एक गधा और एक ऊँट दोनों आपस में गहरे मित्र थे। एक बार गधे ने ऊँट से कहा कि आज मैं यहाँ से थोड़ी दूरी पर एक हरा भरा मैदान देखकर आया हूँ। यदि तुम मेरे साथ वहां चलो तो तुम्हें भी भरपेट हरी हरी घास खाने को मिलेगी।

गधे की यह बात सुनकर ऊँट उसके साथ चल दिया। वहां जाकर ऊँट ने देखा कि जिस जगह गधा उसे लेकर आया है वो तो एक खेत है और जिसके अंदर जाने पर दोनों को किसान द्वारा पिटने का भी डर है।

ऊँट ऐसा सोच ही रहा था कि गधे ने ऊँट से कहा – “क्या सोच रहे हो भाई, अब इन्तजार किस बात का? चलो जल्दी से अंदर चलके मजे से पेट पूजा करते है।”

ऊँट ने कहा – “नहीं नहीं भाई !! यहाँ खतरा है। यदि किसान ने हमें देख लिया तो खूब मार पड़ेगी।”

गधा – “तुम भी ख़ामख़ा डर रहे हो यार!!! अब यहाँ आ ही गए हो तो कुछ तो खाकर ही जायेंगे। चलो अब जल्दी आ जाओ अंदर।

ऐसा कहकर गधा जल्दी से खेत की बाड़ तोड़कर अंदर चला गया और मजे से घास और साथ में गाजर मूली भी खाने लगा।

यह देखकर ऊँट से रहा नहीं गया और वो भी खेत में जा पहुंचा। घास खाते खाते दोनों खेत के काफी अंदर तक जा पहुंचे।

अब थोड़ी देर बाद खेत के मालिक ने देखा की खेत के अंदर एक बड़ा सा जानवर उसकी फसल को चट कर रहा है। क्यूंकी गधा आकार में ऊँट से बहुत छोटा होने के कारण किसान को दिखाई नहीं दे रहा था।

इधर गधा और ऊँट दोनों मजे से पेट पूजा कर रहे थे कि तभी उन्होंने किसी के नजदीक आने की आहट सुनी। तो गधा तो झट से नीचे बैठकर घनी फसल में जा छुपा। लेकिन बेचारा ऊँट चाहकर भी अपने आपको छुपा नहीं पा रहा था।

इधर किसान झट से ऊँट तक जा पहुंचा और डंडे से ऊँट की खूब पिटाई करने लगा। इधर गधा चुपचाप छुपते हुए वहां से खिसक लिया और बेचारा ऊँट किसान की पिटाई से अधमरा हो गया।

अब ऊँट समझ चुका था कि गधे ने उसके साथ धोखा किया है और अब वो गधे से इस बात का बदला लेना चाहता था।

इसलिए थोड़े दिन बाद ऊँट ने गधे से कहा कि दोस्त !! यहाँ से थोड़ी दूरी पर एक गांव है और अभी इस समय वहां एक बड़ा सा मेला लगता है। क्या तुम भी मेरे साथ आना चाहोगे।

गधे ने कहा – “हां जरूर, मैं भी चलूँगा तुम्हारे साथ।”

उसके बाद दोनों साथ चल पड़े। उस रास्ते में एक नदी भी आती थी। जब दोनों नदी के किनारे पहुंचे तो गधे ने कहा – अरे ये नदी तो बहुत गहरी होगी। इसमें तो हम दोनों डूब जायेंगे, इसे हम कैसे पार करेंगे?

ऊँट ने कहा – तुम चिंता मत करो और जल्दी से आकर मेरी पीठ पर बैठ जाओ। मैं तुम्हे अभी नदी पार कराता हूँ।

गधा अब ऊँट की पीठ पर बैठ जाता है। इसके बाद ऊँट धीरे धीरे नदी में गहरे पानी में जाने लगता है। और थोड़ी देर बाद ऊँट नदी के बीचो बीच पहुँच आकर गधे से कहता हैं – यार दोस्त मुझे तो बहुत जोरों की खुजली हो रही है। और ये खुजली मिटाने के लिए मुझे इस पानी में लेटना पड़ेगा। तभी थोड़ा आराम मिलेगा मुझे।

ऊँट की यह बात सुनकर गधे ने कहा – अरे नहीं नहीं, ये तुम क्या करने जा रहे हो। ऐसा करने से तो मैं पानी में गिर जाऊंगा। ऐसा करो तुम जल्दी से नदी पार करो फिर बाहर जाकर खूब लोटपोट हो लेना।

ऊँट ने कहा – नहीं भाई इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता। अब तो मैं पानी में लोटकर ही रहूँगा। तुम्हारी तुम जानो।

और ऐसा कहकर ऊँट पानी में लोटपोट होने लगता है जिसके कारण गधा सीधा नीचे पानी में गिर जाता है और डूबने लगता है।

ये देखकर ऊँट को खूब मजा आने लगता है। और वो हँसते बोला – क्यों अब आया न मजा !! याद करो उस दिन जब तुम्हारी वजह से मुझे कितनी मार पड़ी थी और तुम मुझे धोखा देकर वहां से भाग गए थे। अब देखो तुम भी मेरा ये खेल।

ऐसा कहकर ऊँट एक बार फिर से पानी में लोटपोट होने लगता है और गधा फिर से पानी में डूबने लगता है। जब काफी देर तक ये सब होता रहा तो गधे ने ऊंट से माफ़ी मांगी। ओर ऊँट ने गधे को पानी से बाहर निकाल लिया।

अब गधे ने ऊँट से दोबारा वैसा न करने की कसम खा ली और इसके बाद वे दोनों फिर से एक अच्छे मित्र की तरह रहने लगे।

कहानी से शिक्षा : सच्चे मित्र की परीक्षा मुश्किल घड़ी में ही होती हैं।

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2. मुर्ख गधा

किसी जंगल में एक गधा रहता था। एक बार किसी बात को लेकर जंगल के सारे जानवरों ने एक सभा (meeting) बुलाई। उस सभा में गधे को भी बुलाया गया।

जब सभा हो रही थी तो अचानक सब जानवर जोर जोर से हंसने लगे लेकिन गधा बिलकुल भी नहीं हँसा। ये देखकर कुछ जानवर गधे को देखने लगे और सोचने लगे कि सब तो हँस रहे है लेकिन ये गधा क्यों नहीं हंस रहा है? लगता है गधा भाई कुछ ज्यादा ही सीरियस है!!!

अगले दिन उन जानवरों ने गधे के जोर जोर से हसने की आवाज सुनी। सबके सब उसी जगह पहुंचे तो उन्होंने उसी गधे को जोर जोर से हँसता हुआ पाया।

सब के सब इस बात से फिर आश्चर्य में पड़ गए कि आखिर ऐसी क्या बात हो गई जिससे ये गधा अकेला ही इतना जोरो से हंस रहा है।

जब उन्होंने गधे से हंसने का कारण पूछा तो उसने कहा कि कल उस सभा में जिस बात पर तुम सब हंस रहे थे वो बात तब मुझे समझ नहीं आ रही थी लेकिन वो बात मुझे अब समझ में आ गयी है। इसलिए हंसना तो बनता है भाई।

यह कहकर गधा एक बार फिर जोर जोर से हंसने लगा और जंगल के जानवर फिर उसे देखने लगे।

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3. चालाक गधा

एक व्यापारी था और उसके पास एक गधा था। वह रोज गधे के ऊपर एक नमक की बोरी लादकर उसे नजदीकी बाजार में बेचने जाया करता था।

गधा रोज रोज के बोझ से परेशान होने लगा और एक दिन उसने इसका एक आसान उपाय ढूंढ नीकाला। और वो यह था कि रास्ते में एक नदी पड़ती थी जिसे उसे रोज पार करना पड़ता था।

अब जब भी व्यापारी अपने गधे पर एक भारी भरकम नमक की बोरी लादकर उस नदी में से गुजरने लगता तो गधा तुरंत ही उस पानी में जा बैठता जिससे बोरी का सारा नमक पानी में घुल जाता।

और इस प्रकार गधा उस बोझ से मुक्त हो जाता लेकिन उसके मालिक को काफी नुकसान उठाना पड़ता। इस प्रकार कुछ दिन ऐसा ही चलता रहा। धीरे धीरे व्यापारी को गधे की सारी चालाकी समझ में आने लगी।

अब वो इसका उपाय ढूंढ़ने लगा और साथ ही वो गधे को भी सबक सिखाना चाहता था।

अगले दिन उसने अपने गधे पर नमक की बजाय कपास (रुई) की बोरी लाद दी और बाजार की और चल पड़ा।

इस बात से अब गधे बड़ी ख़ुशी हुई और वो सोचने लगा कि उसके मालिक ने आज तो उसे बोझ से बिल्कुल ही मुक्त कर दिया लगता है। शायद रोज रोज नुकसान उठाने से उसकी अक्ल ठिकाने आ गयी है।

जब दोनों नदी के पास पहुंचे तो गधा एक बार फिर से पानी में जाकर बैठ गया। लेकिन ये क्या !! जैसी ही गधा पानी में बैठा तो उसके ऊपर रखी सारी रुई पानी में भीग कर पहले से काफी ज्यादा भारी हो गयी।

इधर व्यापारी को भी बस इसी बात का इन्तजार था। इसलिए वो तुरंत ही गधे कोडंडा मारकर चलने का इशारा करता है। लेकिन ये क्या !! गधा अब बोझ के मारे बिल्कुल भी चल नहीं पा रहा। था।

लेकिन जब व्यापारी फिर से गधे को डंडा दिखाता है तो गधा जैसे तैसे करके धीरे धीरे आगे बढ़ने लगता है। गधा अब समझ चुका था कि उसके मालिक ने ये सब जानबूझ कर किया है।

कहानी से शिक्षा : जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल मिलेगा।

और आखिर में,

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Rakesh Verma

Rakesh Verma is a Blogger, Affiliate Marketer and passionate about Stock Photography.

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