Majedaar Kahani Hindi Me | तीस मार खाँ की मजेदार कहानी हिंदी में

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका इस ब्लॉग पे। आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ एक ऐसी Majedaar Kahani Hindi Me जो पढ़ने में आपको रौचक तो लगेगी साथ आपको खूब हँसी भी खूब आएगी। इसलिए आज के इस कलेक्शन में आपको बेहद ही Majedaar Kahani Hindi Me|तीस मार खाँ की मजेदार कहानी हिंदी में पढ़ने को मिलेगी।
तो आईये बिना देरी किये शुरू करते है तीस मार खाँ Majedaar Kahani Hindi Me:
Majedaar Kahani Hindi Me | तीस मार खाँ की मजेदार कहानी हिंदी में
Majedaar Kahani Hindi Me | तीस मार खाँ की मजेदार कहानी हिंदी में 


"तीस मार खाँ" Majedaar Kahani Hindi Me:

एक बार की बात है रात का समय था और ज़ोर की बारिश हो रही थी। उसी बारिश में एक किसान अपनी टूटी फूटी झोपड़ी में सो रहा था। उसके घर के पीछे एक बाड़े में उसके कुछ गधे भी बंधे हुए थे। तभी एक शेर जंगल से बाहर निकलकर उसके गाँव में चला आया परन्तु बारिश तेज होने के कारण वो उस बाड़े में जा पहुँचा। 

रात के घुप्प अँधेरे की वजह से वह बाड़े में बंधे गधों को नहीं पहचान पाया। इसलिए वो शेर चुपचाप उन गधों के बीचो बीच जाकर खड़ा हो गया। थोड़ी देर बाद झोपड़ी में से उस किसान के कुछ बुदबुदाने की आवाज आने लगी -" यार कितनी तेज बारिश हो रही है मैं ठीक से सो भी नहीं पा रहा हूँ। जगह जगह गीला हो रहा है, क्या करू अब मैं ?"

उधर किसान की ये बाते चुपके से शेर सुन रहा था। शेर ने सोचा कि अब मैं इसे खाकर अपनी भूख मिटाऊंगा और वो मौके की फ़िराक में झोपडी पर नजर दौड़ाने लगा। 

उधर झोपड़ी में बार बार पानी टपकने से परेशान होकर किसान तेज आवाज में बोल उठा "यार इस टपके ने तो परेशान करके रख दिया इतना डर तो मुझे शेर से भी नहीं लगता जितना टपके से लगता है "

यह सुनकर शेर डर के मारे कांपने लगा उसने सोचा कि यार यह किसान किस टपके की बात कर रहा है क्या यह टपका मुझसे भी ताकतवर है यह कैसा होगा यानी यह टपका मुझसे भी ताकतवर होगा तभी तो किसान ऐसा कह रहा है, नहीं-नहीं अब मुझे यहां से चले जाना चाहिए अब मैं यहां बिल्कुल नहीं रुकूंगा।

तभी बारिश से परेशान होकर किसान गांव में अपने दूसरे घर की ओर जाने लगा और वह बाड़े में पहुंचकर किसी एक गधे पर बैठकर जाना चाहता था इसलिए वह बाड़े में आकर शेर को गधा समझकर उस पर जा बैठा। ऐसा करते ही शेर बिल्कुल घबरा गया क्यूंकि शेर ने सोचा कि वो टपका अब तो मेरी पीठ पर ही आकर बैठ गया है , अब तो अब तो मेरी खैर नहीं, लगता है ये अब मुझे जिन्दा नहीं छोड़ेगा। 

तभी किसान ने उसके दोनों कान जोर से मरोड़े ताकि वो चल पड़े। 

अब तो वह शेर समझकर बहुत डर गया उसने सोचा कि अब तो मौत बिल्कुल निश्चित है इस टपके ने तो अब अपना रूप दिखाना शुरू कर दिया हैं। लेकिन अब क्या किया जा सकता है, बस चुपचाप मुँह बंद रखकर भागो।

किसान ने शेर के दोनों कान और तेजी से मरोड़े तो शेर और तेजी से दौड़ने लगा और दौड़ते दौड़ते पूरी रात हो गई और गांव तक पहुंचते-पहुंचते सुबह होने लगी। तभी गांव के कुछ लोगों ने शेर पर बैठकर जा रहे उस आदमी को देखा है और वह कहने लगे अरे देखो- देखो यह शेर पर बैठा हुआ है, परन्तु आज यह शेर पर कैसे बैठा हुआ है।

गाँव के उन आदमियों ने उस किसान को पहचान लिया था परंतु शेर उनकी बातों को समझ नहीं पाया उसने तो यही सोचा कि यह जो टपका है इसके बारे में यह गांव वाले यह पहले से ही जानते हैं, लेकिन मैं इससे कैसे बचू।मैं तो इसके डर के मारे गांव वालों से कुछ कह भी नहीं सकता और यदि मैंने ऐसा किया तो यह मुझे जिन्दा नहीं छोड़ेगा। और वह चुपचाप चलता जा रहा था।  

आगे चलकर कुछ गांव वाले फिर मिले और उसे देखकर कहने लगे और यह देखो यह आज तो शेर पर बैठकर जा रहा है शेर पर बैठे उस किसान ने सोचा कि - यह लोग क्या कह रहे हैं यह तो एक गधा है और यह इसे शेर कह रहे हैं उसने सोचा कि जब सब लोग ऐसा कह रहे हैं तो हो सकता है यह शेर ही हो।  

उसने जब शेर की और देखा तो किसान के होश उड़ गए और किसान डर के मारे कांपने लगा -अरे यह क्या यह तो सच में एक शेर ही है, अब मैं क्या करूं, कैसे बच्चू इससे यह तो मुझे जिंदा ही खा जाएगा और किसान ने बिलकुल हिलना तक बंद कर दिया। 

उधर शेर चलता ही जा रहा था उसके अंदर का डर अब और ज्यादा बढ़ता जा रहा था उसने सोचा कि यह टपका अभी भी मेरा पीछा नहीं छोड़ रहा है मेरा तो आज मरना निश्चित है और उधर वह किसान उस शेर से पीछा छुड़ाने की तरकीब सोचने लगा।

गांव गुजर जाने पर अब वह शेर जंगल की ओर जाने लगा। तभी किसान ने आगे रास्ते में एक बड़ा सा बरगद का पेड़ देखा और जैसे ही वह शेर उस बरगद के पेड़ के नीचे से गुजरने लगा तो उस किसान ने बरगद की लटकती हुई जड़े पकड़ ली अपने दोनों हाथों से और पेड़ पर चढ़ गया। 

इधर जैसे ही वह किसान उस पेड़ पर चढ़ा तो शेर की जान में जान आ गयी क्यूंकि अब दुश्मन ने उसे छोड़ दिया था। अब शेर सोचने लगा अरे अब तो टपका इसी पेड़ पर रुक गया है अब जल्दी से भाग लेते हैं यहां से नहीं तो पता नहीं यह टपका मेरा क्या हाल करेगा, लगता है यह टपका इसी पेड़ पर रहता है तभी तो इतनी देर तक मुझ पर बैठकर सवारी करता रहा चलो जो हुआ अच्छा हुआ अब भाग लेते हैं यहां से, अब मैं फिर कभी भी इस पेड़ के पास नहीं लौटूंगा।

उधर और किसान शेर के जाने के बाद पेड़ से नीचे उतर कर अपने गांव की ओर चल दिया जब गांव के लोगों ने उसे देखा तो कहने लगे अरे आज तो तुम शेर पर बैठकर जा रहे थे अरे तुम शेर की सवारी कर रहे थे, तुम तो बहुत बहादुर हो।

यह सुनकर किसान अपने मन में इतराने लगा और अकड़ में बोलता है हाँ शेर क्या चीज है इनको तो मैं जब चाहूं अपने बस में कर सकता हूँ, मैं शेर से नहीं डरता। तभी गांव वालों ने कहा यह तो शेर से भी नहीं डरता कितना निडर आदमी है। 

धीरे धीरे यह बात राजा तक पहुंच गई और उसने उस किसान को दरबार में बुलाया और कहा- "मैंने सुना है कि तुम बहुत बहादुर हो और शेर से भी नहीं डरते क्या सच में तुम शेर से नहीं डरते  .... !!! अब किसान घबरा गया वह मन ही मन सोचने लगा 

अरे अब तो मैं अपने झूठ के कारण अब और भी परेशानी में पढ़ने वाला हूं राजा ने कहा देखो हमारे इस गाँव में एक शेर का आतंक है जो रात में हमारे गांव में आ जाता है और गांव के मवेशियों को जानवरों को उठाकर ले जाता है यह हमारे लिए बहुत बड़ा खतरा है क्या तुम उस शेर को पकड़ कर मेरे सामने ला सकते हो राजा की बात सुनकर वह किसान बिल्कुल डर गया उसके सामने तब उस रात के मंजर याद आने लगे।

अब वह सोचने लगा कि उस दिन तो जैसे तैसे शेर से जान बची थी लेकिन अब तो सच में जान जाएगी ही अब तो बचने का भी कोई उपाय नहीं है क्या किया जाये। लेकिन फिर भी सबके सामने उसने राजा का या निमंत्रण राजा की बात मान ली और और राजा ने उसे कुछ पैसे दिए उसके बाद वह किसान बाजार से एक मोटी रस्सी एक बकरा और एक बड़ा सा जाल खरीद कर लाया और जंगल की ओर चल पड़ा।

वह जंगल की ओर जा रहा था तभी रास्ते में उसे वह बरगद का पेड़ दिखाई दिया उसने वहीं रुक कर उस पेड़ के नीचे एक गड्ढा खोदना शुरू किया और उस गड्ढे में कुछ पत्ते गिरा कर उसमे जाल को फैला दिया और उसके अंदर बकरे को रख दिया और बकरे की बकरे के गले में मोटा रस्सा बांधकर वह किसान पेड़ पर जा बैठा अब वह शेर के आने का इंतजार करने लगा।

थोड़ी देर में जब बकरे का घास खत्म हो गया तो वह जोर-जोर से मिनीआने लगा बकरे की आवाज जंगल में दूर-दूर तक जा रही थी तभी उधर से शेर को बकरे की आवाज सुनाई दी तो वह आवाज की ओर चल पड़ा उसने देखा कि वह आवाज एक गड्ढे में से आ रही है लेकिन तभी उसे वह पेड़ दिखाई दिया तो मन में कुछ शंका हुई उसे वह घटना याद आ चुकी थी।

लेकिन इस बार भूख के कारण शेर क्या करता उसने सोचा चलो एक बार चल कर देख ही लिया जाए आखिर शिकार भी तो करना है और जैसे ही वह शेर पेड़ के पास आया तो वह बकरे को देखकर उस गड्ढे में छलांग लगाने लगा। उधर किसान इसी मौके की तलाश में था और जैसे ही शेर ने गड्ढे में छलांग लगाई तो किसान में रस्सी को जोर से खींचा और बकरे को बाहर निकाल लिया।

शेर अब जाल में फंस चुका था शेर यह देखकर अब और भी ज्यादा डर गया उसका डर अब यकीन में बदल गया की अब तो वही हुआ जो मैंने सोचा था हो न हो यह उस टपके का ही किया धरा है यह टपका आखिर मुझे मार कर ही रहेगा।

तभी उसने किसान को पेड़ से उतरते देखा तो वह सोच में पड़ गया की क्या यह वही टपका है जिसने मुझे उस रात बहुत परेशान किया था। अरे...!! यह तो इंसान है। यह देखकर शेर अब गुस्से में गुर्रा उठा लेकिन अब वो क्या कर सकता था। 

उधर किसान शेर को जाल में बंद करके राजा के दरबार में हाजिर हुआ तो सब लोग बहुत खुश हुए और उस युवक की जय जय कार करने लगे राजा ने उसकी इस बहादुरी पर उसे खूब इनाम भी दिया और उसका अब नया नाम तीस मार खाँ रख दिया गया अब गांव के सभी लोग मुझे तीस मार खा कहकर बुलाने लगे। 

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धन्यवाद।

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